Class 6 Hindi

Chapter 3 — Pahli Boond

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Overview

Summary

Chapter 3 of the Class 6 Hindi NCERT textbook (Malhar), 'Pahli Boond' (पहली बूँद), बाल साहित्यकार गोपालकृष्ण कौल द्वारा रचित एक कविता है, जो वर्षा की पहली बूँद के धरती पर पड़ने से जागती प्रकृति के उल्लास का अद्भुत चित्रण प्रस्तुत करती है।

  • केंद्रीय भावपावस (वर्षा ऋतु) के पहले दिन गिरती पहली बूँद से सूखी-प्यासी धरती को नव-जीवन मिलता है और संपूर्ण प्रकृति में उत्साह एवं आनंद जाग उठता है।
  • प्रकृति का सजीव चित्रणसूखी धरती के अधरों पर बूँद अमृत की तरह गिरती है, अंकुर फूट पड़ते हैं और हरी दूब मुस्कुराती है। बादल बिजली के सुनहरे पंख लगाए नगाड़े बजाते हुए धरती की तरुणाई जगाते हैं।
  • काव्य-सौंदर्य'-सी/-सा' से तुलनाएँ — 'गिरी बूँद अमृत-सी', 'नीले नयनों-सा यह अंबर' — और बादलों का मानवीकरण (करुणा से अश्रु बहाना, चिर-प्यास बुझाना) कविता को प्रभावशाली बनाते हैं।
Essentials

Key points & formulas

  1. 01कवि: गोपालकृष्ण कौल (1923–2007) — बाल साहित्यकार; प्रकृति, देश-प्रेम और जीव-जंतुओं पर मनोरम कविताएँ लिखने के लिए प्रसिद्ध।
  2. 02विधा: कविता — पावस (वर्षा ऋतु) के पहले दिन धरती पर गिरती पहली बूँद को केंद्र में रखकर प्रकृति का सजीव चित्रण।
  3. 03केंद्रीय भाव: वर्षा की पहली बूँद से सूखी-प्यासी धरती को नव-जीवन मिलता है और संपूर्ण प्रकृति में उत्साह एवं आनंद जाग उठता है।
  4. 04प्रमुख काव्य-सौंदर्य: '-सी/-सा/-से' से तुलना — 'गिरी बूँद अमृत-सी', 'नीले नयनों-सा यह अंबर', 'काली पुतली-से ये जलधर'; बादलों को मानव की तरह चित्रित किया गया है — नगाड़े बजाना और करुणा से अश्रु बहाना।
  5. 05कठिन शब्दार्थ: पावस = वर्षा ऋतु; अधर = होंठ; वसुंधरा = पृथ्वी; रोमावलि = रोम/रोएँ की पंक्ति।
  6. 06कठिन शब्दार्थ: जलधर = बादल (जल धारण करने वाला); अंबर = आकाश; तरुणाई = यौवन/जवानी; चिर-प्यास = चिरस्थायी प्यास।
  7. 07कठिन शब्दार्थ: शस्य-श्यामला = फसलों से भरी हरी-भरी धरती; करुणा-विगलित = करुणा से पिघला हुआ; नगाड़ा = एक पारंपरिक वाद्ययंत्र।
Questions

Frequently asked questions

01

Pahli Boond का सारांश क्या है?

'पहली बूँद' कविता में गोपालकृष्ण कौल ने वर्षा की पहली बूँद के धरती पर गिरने का सुंदर चित्रण किया है। बूँद अमृत की तरह सूखी धरती पर गिरती है, अंकुर फूट पड़ते हैं, बादल नगाड़े बजाते हैं और बूढ़ी धरती फिर से हरी-भरी बनने को ललचाती है।

02

Pahli Boond के कवि कौन हैं?

'पहली बूँद' कविता के कवि गोपालकृष्ण कौल (1923–2007) हैं। वे बाल साहित्यकार थे और उन्होंने बच्चों के लिए प्रकृति, देश-प्रेम और जीव-जंतुओं पर अनेक मनोरम कविताएँ लिखी हैं।

03

Pahli Boond का केंद्रीय भाव क्या है?

कविता का केंद्रीय भाव यह है कि वर्षा की पहली बूँद से सूखी और प्यासी धरती को नया जीवन मिलता है। बूँद के गिरते ही प्रकृति में नई ऊर्जा, हरियाली और उल्लास जाग उठता है।

04

Pahli Boond summary in hindi

इस कविता में पावस के पहले दिन की पहली बूँद धरती पर गिरती है। धरती के सूखे अधरों पर बूँद अमृत-सी राहत देती है, अंकुर उगते हैं, हरी दूब मुस्कुराती है। बादल नगाड़े बजाते हैं, करुणा से अश्रु बहाकर धरती की चिर-प्यास बुझाते हैं और बूढ़ी धरती फिर से शस्य-श्यामला बनने को तरसती है।

05

'पावस' शब्द का क्या अर्थ है?

कविता में 'पावस' का अर्थ है वर्षा ऋतु। 'वह पावस का प्रथम दिवस' — अर्थात वर्षा का पहला दिन।

06

'जलधर' शब्द का क्या अर्थ है?

'जलधर' दो शब्दों से बना है — 'जल' और 'धर'। इसका शाब्दिक अर्थ है जल को धारण करने वाला। कविता में 'जलधर' का प्रयोग बादल के अर्थ में हुआ है।

07

'अंबर' और 'धरा' का क्या अर्थ है?

'अंबर' का अर्थ है आकाश और 'धरा' का अर्थ है पृथ्वी। कविता में 'नीले नयनों-सा यह अंबर' और 'पहली बूँद धरा पर आई' जैसी पंक्तियों में इन शब्दों का प्रयोग हुआ है।

08

कविता में बादलों का वर्णन कैसे किया गया है?

कविता में बादलों की 'काली पुतली' से तुलना की गई है और बिजलियों के सुनहरे पंख लगाए आकाश में उड़ता सागर कहकर उनका काव्यात्मक चित्रण किया गया है। बादल नगाड़े बजाकर धरती की तरुणाई जगाते हैं और करुणा-विगलित होकर अश्रु बहाते हैं।

09

कविता में किन चीज़ों से तुलना की गई है?

कविता में मुख्य रूप से '-सी/-सा/-से' के द्वारा तुलना की गई है — 'गिरी बूँद अमृत-सी', 'नीले नयनों-सा यह अंबर', 'काली पुतली-से ये जलधर', 'वसुंधरा की रोमावलि-सी हरी दूब'। इसके अलावा बादलों को मानव की तरह चित्रित किया गया है — नगाड़े बजाना और करुणा से अश्रु बहाना।

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'शस्य-श्यामला' का क्या अर्थ है?

'शस्य-श्यामला' का अर्थ है फसलों और हरियाली से भरी-पूरी धरती। कविता में बूढ़ी धरती वर्षा के बाद फिर से 'शस्य-श्यामला' बनने को ललचाती है।

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'तरुणाई' शब्द का क्या अर्थ है?

'तरुणाई' का अर्थ है यौवन या जवानी। कविता में 'बादल धरती की तरुणाई' जगा रहे हैं — अर्थात बादल अपनी गर्जना से सोई हुई धरती को फिर से जवान और हरा-भरा बनाने का संदेश देते हैं।

12

गोपालकृष्ण कौल कौन थे?

गोपालकृष्ण कौल (1923–2007) एक बाल साहित्यकार थे। उन्होंने बच्चों के लिए देश-प्रेम, प्रकृति और जीव-जंतुओं पर अनेक मनोरम कविताएँ लिखी हैं। उनकी एक अन्य कविता 'हम कुछ सीखें' में वे कहते हैं — 'देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें।'

13

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