Class 8 Hindi

Chapter 1 — स्वदेश

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Overview

Summary

Chapter 1 of the Class 8 Hindi NCERT textbook (Malhar), 'Swadesh' (स्वदेश), गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' रचित एक देश-प्रेम का आह्वान गीत है — यह बताता है कि जिस हृदय में स्वदेश का प्यार और साहस नहीं, वह हृदय नहीं पत्थर है।

  • देशभक्ति का आह्वानकविता पाठक को स्वदेश-प्रेम, जोश और साहस के लिए प्रेरित करती है। कवि का संदेश है कि जो जोश न जगा सके, साहस छोड़ दे या जाति-उद्धार न कर सके, उसके जीवन में कोई सार नहीं।
  • देश की महिमा और आत्मगौरवकवि उस भूमि का गुणगान करते हैं जिसकी मिट्टी में हम पले-बढ़े, जिसने दाना-पानी दिया और जिसका ज्ञान-खजाना पूरे विश्व को आकर्षित करता है — यही देश हमारी पहचान का आधार है।
  • नागरिक ही देश के स्वामीकविता यह भाव जगाती है कि देश के सभी नागरिक उसके राजा-रानी हैं और उन्नति के सारे साधन उनके अपने हाथों में हैं, इसलिए देश का भविष्य गढ़ने का उत्तरदायित्व भी उन्हीं का है।
Essentials

Key points & formulas

  1. 01कवि: गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' (1883–1972), जन्म उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद में; उन्होंने राष्ट्र-प्रेम के साथ-साथ किसान, मजदूर और सामाजिक कुरीतियों पर भी प्रभावकारी कविताएँ लिखीं
  2. 02विधा: कविता — देश-प्रेम के लिए प्रेरित और उत्साहित करने वाली देशभक्ति कविता
  3. 03केंद्रीय भाव: जिस हृदय में स्वदेश के प्रति प्रेम, जोश और साहस नहीं वह हृदय नहीं पत्थर है; देश की उन्नति सब नागरिकों के अपने हाथों में है
  4. 04प्रमुख रचनाएँ: त्रिशूल तरंग, राष्ट्रीय मंत्र, कृषक क्रंदन
  5. 05कठिन शब्दार्थ — परवाने: दीपक की लौ पर जलने वाले पतंगे; यहाँ देश के लिए बलिदान देने को तत्पर व्यक्ति
  6. 06कठिन शब्दार्थ — भू का भार: पृथ्वी पर बोझ; जो देश के प्रति उदासीन है वह व्यर्थ है
  7. 07कठिन शब्दार्थ — पसीजना: द्रवित होना, हृदय का पिघलना; जो देश की महिमा से पसीजे नहीं वह निरर्थक है
Questions

Frequently asked questions

01

स्वदेश कविता का सारांश क्या है?

गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' की कविता 'स्वदेश' देश-प्रेम का आह्वान गीत है। कवि कहते हैं कि जिसमें स्वदेश के प्रति प्रेम नहीं वह हृदय पत्थर है। जो जोश न जगा सके, साहस छोड़ दे, या जाति-उद्धार न कर सके — उसके जीवन में कोई सार नहीं। देश के सभी नागरिक उसके राजा-रानी हैं और देश की उन्नति के सभी साधन उनके अपने हाथों में हैं।

02

स्वदेश के कवि/रचयिता कौन हैं?

स्वदेश कविता के रचयिता गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' हैं। उनका जन्म 1883 में उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद में हुआ और निधन 1972 में हुआ। सरकारी नौकरी के कारण उन्हें 'त्रिशूल' उपनाम भी रखना पड़ा।

03

स्वदेश कविता का केंद्रीय भाव क्या है?

कविता का केंद्रीय भाव देश-प्रेम की अनिवार्यता है। कवि का कहना है कि जिस हृदय में स्वदेश के प्रति प्रेम, साहस और जोश नहीं, वह हृदय पत्थर के समान है। प्रत्येक नागरिक को देश की उन्नति के लिए कर्मठता से काम करना चाहिए क्योंकि सभी साधन उनके अपने हाथों में हैं।

04

"वह हृदय नहीं है पत्थर है" पंक्ति का क्या अर्थ है?

इस पंक्ति का अर्थ है संवेदनहीनता। जिस व्यक्ति के मन में स्वदेश के प्रति प्रेम की भावना नहीं है वह संवेदनशील मनुष्य नहीं, पत्थर की तरह निर्जीव है। यह पंक्ति कविता का मुख्य भाव बनकर बार-बार आती है।

05

"हम हैं जिसके राजा-रानी" में 'हम' किसके लिए आया है?

इस पंक्ति में 'हम' देश के समस्त नागरिकों के लिए आया है। कवि कहते हैं कि जिस देश की मिट्टी में हम पले-बढ़े, जहाँ माता-पिता और बंधु हैं — उस देश के हम सभी नागरिक राजा-रानी हैं, अर्थात् देश पर हमारा अधिकार और उत्तरदायित्व दोनों हैं।

06

कविता में 'परवाने' का क्या अर्थ है?

'परवाने' का अर्थ है दीपक की लौ पर जलने वाले पतंगे। कवि इस शब्द का प्रयोग उन लोगों के लिए करते हैं जो देश के लिए स्वयं को समर्पित कर देते हैं। "है काल-दीप जलता हरदम, जल जाना है परवानों को" — अर्थात् समय की ज्वाला में देश-भक्त जलकर भी अपना योगदान देते हैं।

07

कविता में 'काल-दीप' से क्या तात्पर्य है?

'काल-दीप' का अर्थ है समय का दीपक — यानी मृत्यु या काल जो सदा जलता रहता है। कवि कहते हैं कि जीवन नश्वर है, एक दिन सबको जाना है; इसलिए पतंगे की तरह देश के लिए समर्पित होकर जीवन सार्थक करना चाहिए।

08

'भू का भार' का क्या अर्थ है?

'भू का भार' का अर्थ है पृथ्वी पर बोझ। जो व्यक्ति अपने देश की महिमा और उपकार से प्रभावित नहीं होता, जो देश के लिए कुछ नहीं करता — कवि उसे भू यानी पृथ्वी का भार कहते हैं, अर्थात् ऐसा व्यक्ति निरर्थक है।

09

"जिससे न जाति-उद्धार हुआ" पंक्ति का क्या भाव है?

इस पंक्ति का भाव है कि जो व्यक्ति अपने समाज या देश के उत्थान में कोई योगदान नहीं दे सका, उसका स्वयं का उद्धार भी संभव नहीं। अर्थात् समाज की सेवा और देश-प्रेम ही व्यक्ति के जीवन को सार्थक बनाते हैं।

10

गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' की प्रमुख रचनाएँ कौन-सी हैं?

पाठ के अनुसार उनकी उल्लेखनीय रचनाओं में त्रिशूल तरंग, राष्ट्रीय मंत्र और कृषक क्रंदन शामिल हैं। उन्होंने ब्रजभाषा से लिखना प्रारंभ कर खड़ी बोली के श्रेष्ठ कवियों में अपना स्थान बनाया।

11

'संसार-संग चलना' से कविता में क्या अभिप्राय है?

संसार-संग चलना अर्थात् समाज के साथ कदम मिलाकर चलना, जन-जीवन में सहभागी होना। कवि कहते हैं कि जो व्यक्ति समाज के साथ नहीं चलता उसका संसार में कोई स्थान नहीं होता।

12

Swadesh summary in Hindi

गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' की कविता 'स्वदेश' Class 8 Malhar में है। यह देश-प्रेम का आह्वान गीत है। कवि बताते हैं कि जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं वह पत्थर है; साहस और जोश से भरा जीवन ही सार्थक है। देश के नागरिक इसके राजा-रानी हैं और देश की उन्नति के सभी साधन उनके हाथों में हैं।

13

स्वदेश कविता किस पुस्तक और किस कक्षा में है?

'स्वदेश' कविता कक्षा 8 की हिंदी पाठ्यपुस्तक 'मल्हार' का पहला अध्याय है।

14

क्या स्वदेश अध्याय की PDF मुफ़्त है?

हाँ, बिना साइन-अप के मुफ़्त डाउनलोड करें।

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