Summary
Chapter 4 of the Class 8 Hindi NCERT textbook (Malhar), 'Haridwar' (हरिद्वार), भारतेंदु हरिश्चंद्र का यात्रा-वृत्तांत है — 1871 की हरिद्वार यात्रा के बाद उन्होंने 'कविवचन सुधा' पत्रिका के संपादक को पत्र लिखकर इस पवित्र तीर्थ की प्राकृतिक सुंदरता, गंगा की पवित्रता और अपने आध्यात्मिक अनुभवों का जीवंत वर्णन किया।
- पत्र रूप में यात्रा-वर्णन — यह पाठ पत्र-शैली में लिखा यात्रा-वृत्तांत है, जो 14 अक्टूबर 1871 को 'कविवचन सुधा' में प्रकाशित हुआ। लेखक अपने प्रत्यक्ष अनुभवों को संपादक को संबोधित करते हुए सजीव रूप में प्रस्तुत करते हैं।
- हरिद्वार की प्राकृतिक छटा — लेखक हरे-भरे पर्वतों, विविध रंगों के पक्षियों और शीतल-मधुर गंगा की धारा का मनोरम चित्रण करते हैं — गंगा यहाँ नील धारा और मुख्य धारा में बंटती है, बीच में एक सुंदर छोटा पर्वत है।
- तीर्थ और आध्यात्मिक अनुभव — हरि की पैड़ी, कुशावर्त, नील धारा, कनखल जैसे तीर्थों के दर्शन और गंगा-स्नान से लेखक के मन में बारंबार ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का उदय होता है, जो पाठ का केंद्रीय भाव है।
Key points & formulas
- 01लेखक: भारतेंदु हरिश्चंद्र (1850–1885), आधुनिक हिंदी साहित्य के जनक माने जाते हैं
- 02विधा: यात्रा-वृत्तांत (पत्र रूप में); 'कविवचन सुधा' पत्रिका में 14 अक्टूबर 1871 को प्रकाशित
- 03केंद्रीय भाव: हरिद्वार की प्रकृति, गंगा की पवित्रता और इस पुण्यभूमि के दर्शन से उत्पन्न आध्यात्मिक आनंद
- 04पाँच मुख्य तीर्थ: हरिद्वार (हरि की पैड़ी), कुशावर्त, नील धारा, विल्व पर्वत (विल्वेश्वर महादेव), कनखल
- 05गंगा यहाँ दो धाराओं में बंटती है: नील धारा और मुख्य गंगा धारा; दोनों के बीच एक छोटा सुंदर पर्वत है
- 06कठिन शब्दार्थ — वल्ली: लता/बेल; बधिक: शिकारी; कल्लोल: आनंदपूर्ण शोर
- 07यात्रा में लेखक के साथ मित्र कल्लू जी थे; ग्रहण के समय आनंदपूर्वक स्नान किया और दिन में श्रीभागवत का पारायण किया
Frequently asked questions
01हरिद्वार पाठ का सारांश क्या है?
भारतेंदु हरिश्चंद्र ने 1871 में हरिद्वार की यात्रा की और 'कविवचन सुधा' पत्रिका के संपादक को पत्र लिखकर इस तीर्थ की प्राकृतिक सुंदरता, गंगा की पवित्र धारा, हरे-भरे पर्वतों, पक्षियों और आध्यात्मिक अनुभवों का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने हरि की पैड़ी पर स्नान किया, पाँच मुख्य तीर्थों का उल्लेख किया और गंगा तट पर पत्थर पर सादगी से भोजन करने में सोने की थाल से अधिक सुख पाया।
02हरिद्वार के लेखक कौन हैं?
इस पाठ के लेखक भारतेंदु हरिश्चंद्र हैं (1850–1885)। उन्हें आधुनिक हिंदी साहित्य का जनक माना जाता है। उन्होंने कविता, नाटक, निबंध और यात्रा-वृत्तांत सहित अनेक विधाओं में लेखन किया और 'कविवचन सुधा', 'हरिश्चंद्र मैगजीन' तथा 'बालाबोधिनी' जैसी पत्रिकाएँ प्रकाशित कीं।
03हरिद्वार पाठ किस विधा में लिखा गया है?
यह पाठ यात्रा-वृत्तांत विधा में लिखा गया है और पत्र के रूप में प्रस्तुत किया गया है। भारतेंदु ने यह पत्र 'कविवचन सुधा' पत्रिका के संपादक को लिखा था, जो 14 अक्टूबर 1871 ई. को प्रकाशित हुआ।
04भारतेंदु हरिश्चंद्र हरिद्वार की यात्रा पर कब गए?
भारतेंदु हरिश्चंद्र 1871 ई. में हरिद्वार की यात्रा पर गए। उन्होंने इस यात्रा का रोचक वर्णन 'कविवचन सुधा' पत्रिका के संपादक को पत्र के रूप में किया।
05हरिद्वार के पाँच मुख्य तीर्थ कौन-से हैं?
पाठ के अनुसार हरिद्वार क्षेत्र में पाँच मुख्य तीर्थ हैं: (1) हरिद्वार (हरि की पैड़ी), (2) कुशावर्त, (3) नील धारा, (4) विल्व पर्वत (जहाँ विल्वेश्वर महादेव की मूर्ति है), और (5) कनखल।
06हरि की पैड़ी क्या है?
हरि की पैड़ी हरिद्वार में एक पक्का घाट है जहाँ श्रद्धालु गंगा स्नान करते हैं। लेखक ने इसे हरिद्वार का प्रमुख तीर्थ स्थल बताया है।
07हरिद्वार पाठ का केंद्रीय भाव क्या है?
इस पाठ का केंद्रीय भाव है — हरिद्वार की प्रकृति और पवित्रता से उत्पन्न आध्यात्मिक आनंद। लेखक बताते हैं कि वहाँ जाते ही उनका मन प्रसन्न और निर्मल हो गया और चित्त में बारंबार ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का उदय हुआ।
08पाठ में गंगाजल का वर्णन कैसे किया गया है?
लेखक ने गंगाजल को अत्यंत शीतल और मीठा बताया है। वे लिखते हैं कि जल का रंग स्वच्छ और श्वेत है, वेग बड़ा है और शीतल वायु गंगा के पवित्र जल-कणों को लेकर स्पर्श मात्र से पावन करती हुई संचार करती है।
09'पत्थर पर का भोजन सोने की थाल से बढ़कर था' — इस पंक्ति का अर्थ क्या है?
एक दिन लेखक ने गंगा तट पर रसोई करके पत्थर पर जल के अत्यंत निकट बैठकर भोजन किया। उस प्राकृतिक वातावरण और गंगा की निकटता ने उस साधारण भोजन को अत्यंत सुखद बना दिया — इससे यह भाव व्यक्त होता है कि संतोष और प्रकृति के सान्निध्य में वास्तविक सुख है।
10'बधिक' और 'वल्ली' शब्दों के अर्थ क्या हैं?
पाठ में 'बधिक' का अर्थ है शिकारी। लेखक ने लिखा है कि हरिद्वार के पक्षी नगर के दुष्ट शिकारियों से निडर होकर कल्लोल करते हैं। 'वल्ली' का अर्थ है लता या बेल; पर्वतों पर फैली लताओं का वर्णन इसी शब्द से किया गया है।
11कनखल तीर्थ का क्या महत्त्व है?
लेखक के अनुसार कनखल बड़ा उत्तम तीर्थ है। किसी काल में राजा दक्ष ने यहीं यज्ञ किया था और यहीं सती ने शिव जी का अपमान न सहकर अपना शरीर भस्म कर लिया था।
12लेखक हरिद्वार में कहाँ ठहरे और उनके साथ कौन था?
लेखक दीवान कृपा राम के घर के ऊपर के बंगले पर ठहरे थे और उनके साथ उनके मित्र कल्लू जी भी थे। वहाँ रात को ग्रहण हुआ और उन्होंने ग्रहण में आनंदपूर्वक स्नान किया तथा दिन में श्री भागवत का पारायण किया।
13Haridwar summary in hindi
Haridwar Class 8 Hindi ka yatra-vrittant hai jo Bharatendu Harishchandra ne 1871 mein likha tha. इसमें उन्होंने हरिद्वार की गंगा, पर्वतों, पक्षियों और तीर्थ स्थलों का वर्णन करते हुए अपने आध्यात्मिक अनुभव 'कविवचन सुधा' पत्रिका के संपादक को पत्र में साझा किए। मुख्य तीर्थ हैं — हरि की पैड़ी, कुशावर्त, नील धारा, विल्व पर्वत और कनखल।
14क्या हरिद्वार अध्याय की PDF मुफ़्त है?
हाँ, बिना साइन-अप के मुफ़्त डाउनलोड करें।
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