Summary
Chapter 2 of the Class 8 Hindi NCERT textbook (Malhar), 'Do Gauraiya' (दो गौरैया), भीष्म साहनी की एक हास्य-व्यंग्य शैली की कहानी है — इसमें घर में घोंसला बनाने वाली दो गौरैयों को पिताजी की व्यर्थ निकालने की कोशिशें और अंत में बच्चों के स्वर पर बदलता हृदय चित्रित है।
- जीवों के साथ सहअस्तित्व — कहानी का मूल भाव जीव-जंतुओं के प्रति ममता और सहअस्तित्व है। पहले से चूहे, कबूतर व छिपकलियों से भरे घर में गौरैयों का आना उसी सहजीवन को आगे बढ़ाता है जिसे पिताजी अंततः स्वीकार कर लेते हैं।
- पिताजी का हृदय-परिवर्तन — पिताजी लाठी, बंद दरवाजों और रोशनदान में कपड़ा ठूँसकर गौरैयों को हटाने की बार-बार कोशिश करते हैं, पर घोंसले में नन्हे बच्चों की 'चीं-चीं' सुनते ही उनका कठोर मन पिघल जाता है।
- हास्य और घरेलू चित्रण — माँ के व्यंग्य, पिताजी की असफल चेष्टाओं और गौरैयों के बार-बार लौट आने से कहानी में सहज हास्य उपजता है, जो एक साधारण घरेलू घटना को जीवंत और मनोरंजक बना देता है।
Key points & formulas
- 01लेखक: भीष्म साहनी (1915–2003) — हिंदी के प्रसिद्ध कथाकार; उपन्यास 'तमस' पर साहित्य अकादमी पुरस्कार और पद्म भूषण से सम्मानित।
- 02विधा: गद्य कहानी (हास्य-व्यंग्य शैली में)।
- 03केंद्रीय भाव: जीव-जंतुओं के प्रति ममता और सहअस्तित्व — पिताजी अंत में गौरैयों के बच्चों को देखकर उन्हें घर में रहने देते हैं।
- 04मुख्य पात्र: लेखक (मैं/कथावाचक), माँ, पिताजी और दो गौरैयाँ।
- 05माँ का स्वभाव: वे बार-बार व्यंग्य से कहती हैं कि गौरैयाँ घर नहीं छोड़ेंगी; पिताजी की हर चेष्टा पर हँसती हैं।
- 06शब्दार्थ — सराय: रैन-बसेरा (पिताजी घर को सराय कहते हैं क्योंकि तरह-तरह के जीव-जंतु यहाँ रहते हैं)।
- 07शब्दार्थ — धमा-चौकड़ी: उधम और शोर-शराबा; शब्दार्थ — गुमसुम: चुप और उदास।
Frequently asked questions
01दो गौरैया का सारांश क्या है?
लेखक के घर में पहले से अनेक जीव-जंतु रहते हैं। एक दिन दो गौरैयाँ बिना बुलाए आती हैं और पंखे के गोले में घोंसला बना लेती हैं। पिताजी उन्हें लाठी से, दरवाजे बंद करके और रोशनदान ठूँसकर निकालने की कोशिश करते हैं, पर गौरैयाँ बार-बार लौट आती हैं। जब पिताजी घोंसला तोड़ने लगते हैं तो नन्हे बच्चों की 'चीं-चीं' सुनाई पड़ती है, जिसे सुनकर पिताजी का मन बदल जाता है और वे गौरैयों को घर में रहने देते हैं।
02दो गौरैया के लेखक कौन हैं?
दो गौरैया के लेखक भीष्म साहनी (1915–2003) हैं। वे हिंदी साहित्य के बहुमुखी प्रतिभा के लेखक थे। उनके प्रसिद्ध उपन्यास 'तमस' पर उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला और भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से अलंकृत किया।
03दो गौरैया का केंद्रीय भाव क्या है?
इस कहानी का केंद्रीय भाव जीव-जंतुओं के प्रति करुणा और सहअस्तित्व है। पिताजी पहले गौरैयों को बाहर निकालने पर अड़े रहते हैं, किंतु जब घोंसले में से नन्हे बच्चों की आवाज सुनते हैं तो उनका हृदय पिघल जाता है और वे मुसकराते हुए गौरैयों को घर में स्वीकार कर लेते हैं।
04Do Gauraiya summary in Hindi
Bhishm Sahani ki kahani 'Do Gauraiya' mein ek parivar ke ghar mein do gauraiyaan bina bulaye ghonsla bana leti hain. Pitaji unhe bahar nikalne ki kai koshishen karte hain — laathi chalate hain, darwaze band karte hain, lekin gauraiyaan baar-baar laut aati hain. Jab pitaji ghonsla todne lagte hain, tab nannhe bachcho ki 'chin-chin' sunaai padti hai. Yah sunkar pitaji ka man badal jaata hai aur ve gauraiyaon ko ghar mein rehne dete hain.
05पिताजी ने गौरैयों को निकालने के लिए क्या-क्या किया?
पिताजी ने जोर से ताली बजाई और 'श...शू' कहकर बाँहें झुलाई; फिर लाठी उठाकर गौरैयों पर हमला बोला; दरवाजों के नीचे कपड़े ठूँसे; रोशनदान में भी कपड़ा भरा; अंत में स्टूल पर चढ़कर लाठी से घोंसला तोड़ने की कोशिश की — पर गौरैयाँ बार-बार किसी न किसी रास्ते से लौट आईं।
06माँ का गौरैयों के प्रति क्या रवैया था?
माँ गौरैयों को निकालने में पिताजी की सहायता नहीं करती थीं। वे बार-बार व्यंग्य से कहती थीं कि गौरैयाँ अब घर नहीं छोड़ेंगी। पिताजी की हर चेष्टा पर वे खिलखिलाकर हँसती थीं। जब पिताजी ने घोंसला तोड़ना बंद किया, तो माँ ने सभी दरवाजे खोल दिए ताकि गौरैयों के माँ-बाप अंदर आ सकें।
07गौरैयों ने घोंसला कहाँ बनाया था?
गौरैयों ने बैठक की छत में लगे पंखे के गोले (फैन के आवरण) में घोंसला बनाया। उन्होंने सूखी घास, रुई के फाहे, धागे और थिगलियों से घोंसला तैयार किया और घोंसले में से बाहर की ओर तिनके लटकाए, मानो झालर टाँग रखी हो।
08पिताजी का मन क्यों बदल गया?
जब पिताजी स्टूल पर चढ़कर लाठी से घोंसला तोड़ रहे थे, तभी पंखे के गोले के ऊपर से नन्हीं-नन्हीं दो गौरैयाँ सिर निकालकर 'चीं-चीं' करने लगीं — वे अभी-अभी अंडे से निकली थीं और अपने माँ-बाप को बुला रही थीं। यह देखकर पिताजी ने लाठी एक ओर रख दी और चुपचाप कुर्सी पर आ बैठे।
09भीष्म साहनी कौन थे?
भीष्म साहनी (1915–2003) हिंदी साहित्य के बहुमुखी प्रतिभा के लेखक थे। उन्होंने अपनी कहानियों में देश विभाजन और मानवीय मूल्यों की मार्मिक अभिव्यक्ति की है। उनके प्रसिद्ध उपन्यास 'तमस' पर साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। बच्चों के लिए उन्होंने 'गुलेल का खेल' जैसी कहानियाँ लिखीं।
10सराय शब्द का अर्थ क्या है? पाठ में इसका प्रयोग क्यों हुआ?
सराय का अर्थ है रैन-बसेरा या धर्मशाला — ऐसी जगह जहाँ अनेक लोग अस्थायी रूप से रुकते हों। पाठ में पिताजी अपने घर को सराय इसलिए कहते हैं क्योंकि वहाँ चूहे, कबूतर, चमगादड़, छिपकलियाँ, चींटियाँ और तरह-तरह के पक्षी पहले से ही रहते हैं।
11धमा-चौकड़ी और गुमसुम शब्दों के अर्थ क्या हैं?
धमा-चौकड़ी का अर्थ है उधम, शोर-शराबा और भागदौड़। पाठ में इसका प्रयोग चूहों की रात-भर की हलचल के लिए हुआ है। गुमसुम का अर्थ है चुप और उदास। पाठ में जब पिताजी गौरैयों को बार-बार खदेड़ते हैं तो गौरैयाँ दुबला जाती हैं और गुमसुम होकर दीवार पर बैठ जाती हैं।
12व्यंग्य क्या है? पाठ में माँ ने व्यंग्य कहाँ किया?
व्यंग्य का अर्थ है हँसी-मज़ाक या उपहास के माध्यम से किसी बात को संकेतात्मक ढंग से कहना। पाठ में माँ ने व्यंग्य से कहा — 'छोड़ो जी, चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!' इसका आशय था कि पिताजी गौरैयों को नहीं निकाल पाएँगे।
13क्या दो गौरैया अध्याय की PDF मुफ़्त है?
हाँ, बिना साइन-अप के मुफ़्त डाउनलोड करें।
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