Class 7 Hindi

Chapter 3 — Phool aur Kaanta

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Overview

Summary

Chapter 3 of the Class 7 Hindi NCERT textbook (Malhar), 'Phool aur Kaanta' (फूल और काँटा), अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' की कविता है जिसमें फूल और काँटे के भिन्न स्वभाव के माध्यम से बताया गया है कि पहचान कुल से नहीं, अपने गुणों और कर्मों से होती है।

  • गुण बनाम कुल की पहचानकवि का मूल संदेश है कि व्यक्ति की महानता उसके वंश या कुल से नहीं, बल्कि उसके अपने आचरण और कर्मों से आँकी जाती है। बड़प्पन का अभाव हो तो ऊँचे कुल की बड़ाई भी व्यर्थ है।
  • समान परिस्थिति, भिन्न स्वभावफूल और काँटा एक ही पौधे पर उगते हैं, दोनों पर समान चाँदनी, वर्षा और हवा पड़ती है; फिर भी काँटा चुभता व फाड़ता है और फूल सुगंध व रस बाँटता है — इसी विरोध से चरित्र का महत्त्व उभारा गया है।
  • फूल और काँटा प्रतीक के रूप मेंकविता में फूल अच्छाई, दया, परोपकार और प्रेम का प्रतीक है, जबकि काँटा स्वार्थ, कठोरता और बुराई का। इन प्रतीकों से कवि परोपकारी स्वभाव को श्रेष्ठ और हानिकारक स्वभाव को त्याज्य दिखाते हैं।
Essentials

Key points & formulas

  1. 01कवि: अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' (1865–1947); जन्म — आजमगढ़, उत्तर प्रदेश; इनकी प्रसिद्ध काव्य-कृति 'प्रियप्रवास' को खड़ी बोली का पहला महाकाव्य माना जाता है।
  2. 02विधा: कविता
  3. 03केंद्रीय भाव: समान परिस्थितियों (एक ही पौधा, एक सी चाँदनी, वर्षा, हवा) में पले-बढ़े फूल और काँटे के स्वभाव बिल्कुल अलग हैं — इसी के माध्यम से कवि ने बताया है कि व्यक्ति की महानता उसके कुल से नहीं, उसके गुणों और कर्मों से पहचानी जाती है।
  4. 04फूल — तितलियों को गोद में लेता है, भौंरे को अनूठा रस पिलाता है, सुगंध और रंग से कलियों को प्रसन्न करता है; काँटा — उँगलियाँ छेदता है, वस्त्र फाड़ता है, तितलियों के पंख काटता है, भौंरे के काले शरीर को घायल करता है।
  5. 05कठिन शब्दार्थ — मेह = वर्षा; वर बसन = उत्तम (श्रेष्ठ) वस्त्र; अनूठा = अनोखा, अद्वितीय
  6. 06कठिन शब्दार्थ — सुर शीश = देवताओं का सिर; सोहता = सुशोभित होता है, शोभा देता है; खटकता = चुभता है, अप्रिय लगता है
  7. 07कविता में 'फूल' और 'काँटा' प्रतीक के रूप में प्रयोग किए गए हैं — फूल अच्छाई, दया, परोपकार और प्रेम का प्रतीक है; काँटा स्वार्थ, कठोरता और बुराई का।
Questions

Frequently asked questions

01

फूल और काँटा का सारांश क्या है?

इस कविता में कवि हरिऔध ने बताया है कि फूल और काँटा एक ही पौधे पर जन्म लेते हैं और दोनों पर समान चाँदनी, वर्षा व हवा का प्रभाव पड़ता है, फिर भी उनके स्वभाव बिल्कुल अलग हैं। काँटा दूसरों को पीड़ा पहुँचाता है जबकि फूल अपनी सुगंध और प्रेम से सबको प्रसन्न करता है। कविता का संदेश है कि व्यक्ति की पहचान उसके कर्मों और स्वभाव से होती है, कुल की बड़ाई से नहीं।

02

फूल और काँटा के कवि कौन हैं?

इस कविता के कवि अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' हैं। उनका जन्म 1865 में आजमगढ़, उत्तर प्रदेश में हुआ था और उनका निधन 1947 में हुआ। उनकी प्रसिद्ध काव्य-कृति 'प्रियप्रवास' को खड़ी बोली का पहला महाकाव्य माना जाता है।

03

फूल और काँटा का केंद्रीय भाव क्या है?

कविता का केंद्रीय भाव यह है कि समान परिस्थितियों में पले-बढ़े दो व्यक्तियों के स्वभाव और कर्म भिन्न हो सकते हैं। जैसे फूल और काँटे को एक सी प्रकृति मिलती है फिर भी एक दूसरों को प्रेम देता है और दूसरा पीड़ा — उसी प्रकार व्यक्ति की असली पहचान उसके कुल से नहीं, उसके गुणों और कर्मों से होती है।

04

काँटा किस प्रकार हानिकारक बताया गया है?

कविता के अनुसार काँटा किसी की उँगलियाँ छेदता है, किसी के उत्तम वस्त्र फाड़ देता है, प्यार-डूबी तितलियों के पंख काट देता है और भौंरे के काले शरीर को घायल करता है। इस प्रकार वह चारों ओर पीड़ा और हानि फैलाता है।

05

कविता में फूल के क्या गुण बताए गए हैं?

फूल तितलियों को अपनी गोद में लेता है, भौंरे को अपना अनूठा रस पिलाता है और अपनी सुगंध तथा रंग से कलियों का मन प्रसन्न करता है। वह सबके प्रिय होता है और देवताओं के सिर पर सुशोभित होता है।

06

मेह शब्द का अर्थ क्या है?

कविता में प्रयुक्त 'मेह' शब्द का अर्थ है — वर्षा या बारिश।

07

वर बसन का अर्थ क्या है?

'वर बसन' का अर्थ है — उत्तम या श्रेष्ठ वस्त्र। कविता में बताया गया है कि काँटा किसी के उत्तम वस्त्रों को फाड़ देता है।

08

सुर शीश का क्या अर्थ है?

'सुर शीश' का अर्थ है — देवताओं का सिर। कविता में कहा गया है कि फूल देवताओं के सिर पर सुशोभित होता है, अर्थात् पूजा और सम्मान पाता है।

09

'किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर' — इस पंक्ति का भाव क्या है?

इन पंक्तियों का भाव है कि यदि किसी व्यक्ति में स्वयं में बड़प्पन (महानता, अच्छे गुण, परोपकार) की कमी हो, तो उसके कुल या परिवार की बड़ाई किसी काम नहीं आती। सम्मान कुल से नहीं, व्यक्ति के अपने कर्मों और गुणों से मिलता है।

10

फूल और काँटे में क्या समानताएँ बताई गई हैं?

कविता के अनुसार फूल और काँटे दोनों एक ही जगह जन्म लेते हैं, एक ही पौधा उन्हें पालता है, दोनों पर एक सी चाँदनी पड़ती है, एक सी वर्षा होती है और एक सी हवा बहती है। समान परिस्थितियाँ मिलने के बाद भी उनके ढंग अलग-अलग हैं।

11

'बड़प्पन' शब्द का क्या अर्थ है?

'बड़प्पन' शब्द 'बड़ा' और 'पन' प्रत्यय से बना है। इसका अर्थ है — बड़ाई, श्रेष्ठता, महानता। इसका उपयोग व्यक्तित्व, गुण और चरित्र की ऊँचाई बताने के लिए किया जाता है।

12

हरिऔध जी ने बच्चों के लिए कौन-से कविता-संकलन लिखे?

कवि परिचय के अनुसार हरिऔध जी ने बच्चों के लिए अनेक रोचक कविताएँ लिखीं। उनके उल्लेखनीय कविता-संकलनों में 'चंद्र-खिलौना' और 'खेल-तमाशा' प्रमुख हैं।

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Phool aur Kaanta summary in hindi

Phool aur Kaanta, Class 7 Malhar ki kavita hai. Kavi Hariaudh ne bataya hai ki phool aur kaante ek hi paudhe par janam lete hain, unhe samaan chandni, varsha aur hawa milti hai — phir bhi unke swabhav bilkul alag hain. Kaanta doosron ko pida pahunchata hai jabki phool apni sugandh aur prem se sab ko prasann karta hai. Kavita ka sandesh hai ki vyakti ki pahchan uske karm aur swabhav se hoti hai, kul ki badai se nahin.

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