Class 7 Hindi

Chapter 8 — Birju Maharaj Se Saakshaatkaar

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Overview

Summary

Chapter 8 of the Class 7 Hindi NCERT textbook (Malhar), 'Birju Maharaj Se Saakshaatkaar' (बिरजू महाराज से साक्षात्कार), एक साक्षात्कार है जिसमें पद्मविभूषण पंडित बिरजू महाराज कथक नृत्य की परंपरा, बचपन के संघर्ष, गुरु-शिष्य संबंध और लय के महत्त्व पर विद्यार्थियों के प्रश्नों का उत्तर देते हैं।

  • संघर्ष और माँ की प्रेरणापिता अच्छन महाराज के निधन के बाद परिवार पर आर्थिक संकट आया; माँ ने कर्ज़ लेकर और पुरानी ज़री की साड़ियाँ जलाकर गुज़ारा किया, पर हर हाल में अभ्यास जारी रखने की प्रेरणा दी — यही दृढ़ता उन्हें बड़ा कलाकार बनाती है।
  • कथक की परंपरा और घरानेसाक्षात्कार में कथक की ऐतिहासिक परंपरा तथा लखनऊ, जयपुर और बनारस घरानों के विकास पर प्रकाश डाला गया है। बिरजू महाराज लोक और शास्त्रीय नृत्य के अंतर को समझाकर इस कला की गहराई सामने रखते हैं।
  • गुरु-शिष्य संबंध और लयपिता अच्छन महाराज तथा चाचा शंभू व लच्छू महाराज उनके गुरु थे; गंडा-बंधन गुरु-शिष्य के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है। वे मानते हैं कि लय जीवन में संतुलन और अनुशासन सिखाती है और हुनर ऐसा खज़ाना है जिसे कोई नहीं छीन सकता।
Essentials

Key points & formulas

  1. 01विधा: साक्षात्कार — विद्यार्थियों श्रेया, तनुश्री और माणिक द्वारा पद्मविभूषण पंडित बिरजू महाराज से लिया गया
  2. 02केंद्रीय भाव: कथक नृत्य की परंपरा और गुरु-शिष्य संबंध; लय जीवन में संतुलन व अनुशासन सिखाती है; हुनर ऐसा खज़ाना है जिसे कोई नहीं छीन सकता
  3. 03बचपन में पिता अच्छन महाराज के निधन के बाद परिवार पर आर्थिक संकट आया; माँ ने कर्ज़ लेकर और पुरानी ज़री की साड़ियाँ जलाकर गुज़ारा किया; हर हाल में अभ्यास जारी रखने की प्रेरणा दी
  4. 04गुरु थे पिता अच्छन महाराज, चाचा शंभू महाराज और लच्छू महाराज; घर के माहौल से औपचारिक प्रशिक्षण से पहले ही नवाब के दरबार में नाचने लगे थे
  5. 05कठिन शब्दार्थ — गंडा: गुरु द्वारा शिष्य को बाँधा जाने वाला ताबीज़, जो कथक की तालीम शुरू होने पर गुरु-शिष्य के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है
  6. 06कठिन शब्दार्थ — चाँदनी: बिछाने की बड़ी सफेद चादर, जिस पर पहले के समय में कथक का कार्यक्रम होता था और दर्शक चारों ओर बैठते थे
  7. 07कठिन शब्दार्थ — लहरा: संगीत में एक ताल-लय का प्रतिरूप; नर्तक इसे सुनकर जानता है कि लय सही है या नहीं
Questions

Frequently asked questions

01

Birju Maharaj Se Saakshaatkaar का सारांश क्या है?

इस साक्षात्कार में पद्मविभूषण पंडित बिरजू महाराज अपने बचपन के आर्थिक संघर्ष, माँ के योगदान, गंडा परंपरा, कथक के इतिहास और घरानों, लोक व शास्त्रीय नृत्य के अंतर तथा लय के महत्त्व पर विद्यार्थियों के प्रश्नों का उत्तर देते हैं। मुख्य संदेश है कि लय जीवन में संतुलन बनाए रखती है और हुनर ऐसा खज़ाना है जिसे कोई नहीं छीन सकता।

02

Birju Maharaj Se Saakshaatkaar के लेखक/कवि कौन हैं?

यह एक साक्षात्कार है जिसे विद्यार्थियों श्रेया, तनुश्री और माणिक ने पद्मविभूषण पंडित बिरजू महाराज से लिया। पाठ में किसी अलग लेखक का नाम नहीं दिया गया है।

03

Birju Maharaj Se Saakshaatkaar का केंद्रीय भाव क्या है?

पाठ का केंद्रीय भाव है कि कला को साधना और लगन से जीवित रखा जाता है। लय न केवल नृत्य में, बल्कि जीवन के हर काम में संतुलन बनाए रखती है। गुरु-शिष्य का रिश्ता पवित्र होता है और हुनर ऐसा खज़ाना है जिसे कोई नहीं छीन सकता।

04

बिरजू महाराज के गुरु कौन थे?

बिरजू महाराज के गुरु उनके पिता अच्छन महाराज और उनके चाचा शंभू महाराज तथा लच्छू महाराज थे। घर में कथक का माहौल होने से वे औपचारिक प्रशिक्षण से पहले ही देख-देखकर कथक सीख गए थे और नवाब के दरबार में नाचने भी लगे थे।

05

गंडा का अर्थ क्या है और इसकी क्या परंपरा है?

गंडा एक ताबीज़ होता है जिसे कथक की तालीम शुरू होते समय गुरु शिष्य को बाँधते हैं और शिष्य गुरु को भेंट देता है — यह गुरु-शिष्य के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है। बिरजू महाराज ने इस परंपरा को उलट दिया — वे कई वर्षों तक नृत्य सिखाने के बाद जब शिष्य में सच्ची लगन देखते हैं, तभी गंडा बाँधते हैं।

06

बिरजू महाराज के बचपन में क्या कठिनाइयाँ आईं?

बिरजू महाराज के पिता के देहांत के बाद परिवार आर्थिक संकट में आ गया। जिन डिब्बों में कभी तीन-चार लाख के हार होते थे वे खाली पड़े थे। माँ कभी कर्ज़ लेकर तो कभी पुरानी ज़री की साड़ियाँ जलाकर सोने-चाँदी के तार बेचकर गुज़ारा करती थीं। दिन में खाना मिलता था पर रात को कई बार नहीं।

07

बिरजू महाराज की माँ ने उन्हें क्या सीख दी?

माँ बार-बार यही कहा करती थीं — 'खाने को भले ही चना मिले या कुछ भी न मिले पर अभ्यास ज़रूर करो।' संघर्ष के दौर में उनकी सबसे बड़ी सहयोगी उनकी माँ ही थीं।

08

कथक की परंपरा कितनी पुरानी है और इसके प्रमुख घराने कौन-से हैं?

कथक की परंपरा बहुत पुरानी है — इसकी चर्चा महाभारत के आदिपर्व और रामायण में भी मिलती है। प्रमुख घराने हैं: लखनऊ घराना, जयपुर घराना और बनारस घराना। इसके अलावा रायगढ़ के महाराज चक्रधर की भी अपनी अलग शैली थी।

09

नृत्य सीखने के लिए संगीत का ज्ञान क्यों आवश्यक है?

बिरजू महाराज के अनुसार गाना, बजाना और नाचना — ये तीनों संगीत का हिस्सा हैं। लय का ज्ञान नर्तक के लिए आवश्यक है क्योंकि अगर सुर-ताल की समझ हो तो वह जान पाएगा कि लहरा ठीक है या नहीं। लय नृत्य को सुंदरता प्रदान करती है और जीवन में संतुलन बनाए रखती है।

10

लोक नृत्य और शास्त्रीय नृत्य में क्या अंतर है?

बिरजू महाराज के अनुसार लोक नृत्य सामूहिक होता है — लोग थकान दूर करने और मनोरंजन के लिए मिलकर नाचते हैं और यह नाचने वालों के अपने मन बहलाव के लिए होता है। जबकि शास्त्रीय नृत्य में एक नर्तक अकेला काफी होता है और यह दर्शकों के लिए होता है।

11

बिरजू महाराज ने कथक में क्या नए बदलाव किए?

उन्होंने कथक की पुरानी परंपरा कायम रखते हुए प्रस्तुतीकरण में बदलाव किए। पिता और चाचाओं की खड़े होने की भाव-भंगिमाओं को भी कथक में शामिल किया। तीनों गुरुओं की शिक्षा को इकट्ठा करके एक नया रूप तैयार किया। टैगोर और त्यागराज जैसे आधुनिक कवियों की रचनाओं पर भी कथक रचनाएँ बनाईं।

12

Birju Maharaj Se Saakshaatkaar summary in hindi

यह पाठ पद्मविभूषण पंडित बिरजू महाराज का साक्षात्कार है जिसमें वे कथक की परंपरा और घरानों के इतिहास, अपने बचपन के आर्थिक संघर्ष, गंडा परंपरा, लोक व शास्त्रीय नृत्य के अंतर तथा जीवन में लय के महत्त्व पर विद्यार्थियों से बात करते हैं। उनका कहना है कि हुनर ऐसा खज़ाना है जिसे कोई नहीं छीन सकता।

13

चाँदनी शब्द का क्या अर्थ है?

चाँदनी का अर्थ है बिछाने की बड़ी सफेद चादर। पहले कथक मंच पर नहीं, बल्कि फर्श पर बिछी इसी चाँदनी पर होता था और दर्शक चारों ओर बैठते थे।

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क्या Birju Maharaj Se Saakshaatkaar अध्याय की PDF मुफ़्त है?

हाँ, बिना साइन-अप के मुफ़्त डाउनलोड करें।

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