Summary
Chapter 4 of the Class 7 Hindi NCERT textbook (Malhar), 'Paani Re Paani' (पानी रे पानी), अनुपम मिश्र का निबंध है जिसमें जल-चक्र, जल-संकट और जल-संरक्षण के महत्त्व को समझाते हुए बताया गया है कि तालाबों और भूजल की रखवाली ही अकाल व बाढ़ दोनों से बचने का उपाय है।
- अकाल और बाढ़ — एक ही समस्या के दो रूप — निबंध का मुख्य विचार है कि गर्मी में सूखा और बरसात में बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। दोनों की जड़ में जल-प्रबंधन की कमी है, इसलिए इनका समाधान भी एक ही है — वर्षा-जल को सहेजना।
- धरती रूपी गुल्लक — लेखक धरती को विशाल गुल्लक बताते हैं जिसमें तालाब और झीलें वर्षा-जल को रिसाकर भूजल भंडार भरती हैं। यही संचित जल बरसात के बाद पूरे साल काम आता है, इसलिए जल-स्रोतों की रक्षा आवश्यक है।
- तालाब पाटने का परिणाम — जब लोगों ने तालाबों को कचरे से पाटकर मकान-बाजार बना दिए, तो भूजल घटने लगा और संकट गहराया। निबंध जल-चक्र को समझकर वर्षा-जल संग्रहण करने को ही स्थायी समाधान मानता है।
Key points & formulas
- 01लेखक: अनुपम मिश्र (1948–2016) — प्रखर लेखक, संपादक, पर्यावरणविद और छायाकार
- 02विधा: निबंध (पर्यावरण विषयक)
- 03केंद्रीय भाव: जल-संरक्षण — तालाबों और भूजल की रक्षा करके अकाल व बाढ़ दोनों से बचा जा सकता है
- 04मुख्य विचार: 'अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं' — दोनों का कारण जल-प्रबंधन की कमी है
- 05धरती रूपी गुल्लक: तालाब और झीलों में संग्रहित वर्षा-जल रिसकर भूजल भंडार को समृद्ध करता है, जो बरसात के बाद पूरे साल काम आता है
- 06शब्दार्थ — गुल्लक: पैसे बचाने का मिट्टी का पात्र (पाठ में धरती के जल-भंडार के लिए प्रयुक्त)
- 07शब्दार्थ — भूजल: जमीन के नीचे छिपा जल-भंडार; अकाल: उपसर्ग 'अ' + 'काल' = कुसमय, सूखा
Frequently asked questions
01Paani Re Paani का सारांश क्या है?
इस निबंध में अनुपम मिश्र ने बताया है कि जल-चक्र के सही उपयोग और तालाबों की रक्षा से अकाल व बाढ़ दोनों से बचा जा सकता है। गर्मियों में नल सूखते हैं और बरसात में बाढ़ आती है क्योंकि हमने तालाबों को कचरे से पाटकर नष्ट कर दिया। धरती एक बड़ी गुल्लक है जिसमें वर्षा का पानी जमा होकर भूजल भंडार बनाता है। जल-स्रोतों की रखवाली करना ही समाधान है।
02Paani Re Paani के लेखक कौन हैं?
इस पाठ के लेखक अनुपम मिश्र (1948–2016) हैं। वे प्रखर लेखक, संपादक, पर्यावरणविद और छायाकार थे। उनकी सर्वाधिक चर्चित पुस्तक 'आज भी खरे हैं तालाब' है जिसका ब्रेल लिपि सहित अनेक भाषाओं में अनुवाद हुआ है। वे गांधी शांति प्रतिष्ठान से प्रकाशित पत्रिका 'गांधी मार्ग' के संस्थापक और संपादक भी थे।
03Paani Re Paani का केंद्रीय भाव क्या है?
इस निबंध का केंद्रीय भाव है — जल-संरक्षण। लेखक बताते हैं कि यदि हम जल-चक्र को ठीक से समझें, वर्षा-जल संग्रहित करें और तालाबों व नदियों की रखवाली करें तो अकाल और बाढ़ दोनों से छुटकारा मिल सकता है।
04अकाल और बाढ़ को एक ही सिक्के के दो पहलू क्यों कहा गया है?
गर्मियों में पानी की अत्यधिक कमी (अकाल) और बरसात में पानी की अधिकता (बाढ़) — दोनों का मूल कारण एक ही है: तालाबों का नष्ट होना और जल-चक्र का सही उपयोग न होना। यदि वर्षा का पानी तालाबों में संग्रहित होता तो न गर्मियों में नल सूखते और न बरसात में बस्तियाँ डूबतीं। इसीलिए पाठ में कहा गया है कि 'अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।'
05धरती को गुल्लक क्यों कहा गया है?
जिस प्रकार गुल्लक में धीरे-धीरे पैसे जमा होते हैं और जरूरत पड़ने पर निकाले जाते हैं, उसी प्रकार धरती में तालाब और झीलों के माध्यम से वर्षा का पानी रिसकर भूजल भंडार में जमा होता है। यह छिपा खजाना बरसात के बाद पूरे साल घरों, खेतों और पाठशालाओं में काम आता है।
06गुल्लक शब्द का अर्थ क्या है?
गुल्लक का अर्थ है — पैसे बचाने का मिट्टी का बर्तन। पाठ में इस शब्द का प्रयोग धरती के जल-भंडार के लिए प्रतीक के रूप में किया गया है।
07भूजल भंडार कैसे समृद्ध होता है?
तालाब और झीलों में जमा वर्षा-जल धीरे-धीरे रिसकर और छनकर जमीन के नीचे जाता है, जिससे भूजल भंडार समृद्ध होता है। यह पानी बरसात के बाद पूरे साल खेतों और घरों में उपयोगी होता है।
08तालाबों को क्यों भर दिया गया और इसके क्या परिणाम हुए?
जमीन के लालच में लोगों ने तालाबों को कचरे से पाटकर समतल कर दिया और वहाँ मकान, बाजार, स्टेडियम और सिनेमा बना दिए। इसका परिणाम यह हुआ कि भूजल भंडार घटने लगा — गर्मियों में नल सूख जाते हैं और बरसात में बस्तियाँ डूबने लगती हैं।
09जल-चक्र क्या होता है?
जल-चक्र वह प्रक्रिया है जिसमें समुद्र से उठी भाप बादल बनकर वर्षा के रूप में बरसती है, पानी नदियों में बहता है और नदियाँ फिर से समुद्र में मिल जाती हैं। यह चक्र निरंतर चलता रहता है।
10Paani Re Paani summary in hindi
'पानी रे पानी' कक्षा 7 की हिंदी पुस्तक मल्हार का चौथा अध्याय है जिसे पर्यावरणविद अनुपम मिश्र ने लिखा है। इसमें बताया गया है कि तालाबों के नष्ट होने से अकाल और बाढ़ दोनों आते हैं। धरती एक विशाल गुल्लक है जिसमें वर्षा का पानी भूजल बनकर जमा होता है। जल-चक्र को समझकर वर्षा-जल संग्रहण करना और जल-स्रोतों की रखवाली करना ही इन समस्याओं का समाधान है।
11अनुपम मिश्र की प्रसिद्ध पुस्तकें कौन सी हैं?
अनुपम मिश्र की सर्वाधिक चर्चित पुस्तक 'आज भी खरे हैं तालाब' है जिसका ब्रेल लिपि सहित अनेक भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। उनकी एक और महत्त्वपूर्ण पुस्तक 'साफ माथे का समाज' है।
12वर्षा-जल संग्रहण क्या है?
वर्षा के जल को एकत्र करके उसका भंडारण करना और बाद में प्रयोग करना 'वर्षा-जल संग्रहण' कहलाता है। इसका मूल उद्देश्य है — 'जल जहाँ गिरे वहीं एकत्र कीजिए।' इमारतों की छत पर गिरने वाला वर्षा-जल पाइप द्वारा भंडारण टंकी में पहुँचाया जा सकता है।
13क्या Paani Re Paani अध्याय की PDF मुफ़्त है?
हाँ, बिना साइन-अप के मुफ़्त डाउनलोड करें।
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