Class 7 Hindi

Chapter 5 — Nahin Hona Beemar

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Overview

Summary

Chapter 5 of the Class 7 Hindi NCERT textbook (Malhar), 'Nahin Hona Beemar' (नहीं होना बीमार), स्वयं प्रकाश की हास्य-कहानी है जिसमें एक बच्चा बीमार पड़ने का नाटक करता है और पूरा दिन भूखा-अकेला रहकर सीखता है कि झूठ का फल कड़ी सज़ा होता है।

  • झूठ और बहाने का परिणामकहानी का केंद्रीय भाव है कि झूठ और बहाने का अंत दुखद होता है। बच्चा होमवर्क से बचने के लिए बीमारी का नाटक करता है, पर कड़वी पुड़िया, काढ़ा, भूख और बोरियत झेलकर समझ जाता है कि स्कूल जाना ही बेहतर था।
  • कल्पना बनाम वास्तविक बीमारीअस्पताल में साफ बिस्तर और खीर खाते सुधाकर काका को देख बच्चे को बीमारी 'ठाठ' लगती है। पर असली और कल्पना की बीमारी में ज़मीन-आसमान का फ़र्क उसे तब समझ आता है जब खुद घर में कैद और उपचार में जकड़ जाता है।
  • प्रथम पुरुष हास्य शैलीकहानी बच्चे की ज़ुबानी (कथावाचक) कही गई है, जिससे उसकी नादानी और पछतावा दोनों सजीव लगते हैं। नानाजी-नानीजी के उपचार और उसकी तड़प का वर्णन कथा को रोचक व हास्यपूर्ण बना देता है।
Essentials

Key points & formulas

  1. 01लेखक: स्वयं प्रकाश (1947–2019) — हिंदी के जाने-माने कहानीकार, बच्चों और बड़ों दोनों के लिए रोचक कहानियाँ लिखते थे।
  2. 02विधा: हास्य कहानी (बाल-कहानी), प्रथम पुरुष शैली में लिखी गई।
  3. 03केंद्रीय भाव: झूठ और बहाने का परिणाम दुखद होता है; असली बीमारी और कल्पना की बीमारी में ज़मीन-आसमान का फ़र्क होता है।
  4. 04मुख्य पात्र: कहानी का बच्चा (कथावाचक), नानीजी, नानाजी, सुधाकर काका, मुन्नू।
  5. 05शब्दार्थ — साबूदाना: सागू वृक्ष के तने के गूदे से बना दाना, जो उपवास और बीमारी में खिलाया जाता है।
  6. 06शब्दार्थ — काढ़ा: जड़ी-बूटियों और औषधियों को उबालकर बनाया गया पेय, सर्दी-बुखार में लाभकारी माना जाता है।
  7. 07शब्दार्थ — रजाई: रुई भरा दोहरे कपड़े का जाड़े का ओढ़ना; बच्चा पूरे दिन इसी में छुपा रहा।
Questions

Frequently asked questions

01

Nahin Hona Beemar का सारांश क्या है?

एक बच्चा अस्पताल में बीमार काका को आराम से साबूदाने की खीर खाते देख सोचता है कि बीमार रहना बड़े मजे का है। होमवर्क न होने पर वह खुद बीमारी का नाटक करता है। नानाजी-नानीजी कड़वी दवा देते हैं और खाना बंद कर देते हैं। दिनभर भूखा-बोर रहने के बाद बच्चा सीखता है कि बहाने का नतीजा स्कूल से भी बुरा होता है।

02

Nahin Hona Beemar के लेखक कौन हैं?

इस कहानी के लेखक स्वयं प्रकाश (1947–2019) हैं। वे हिंदी के जाने-माने कहानीकार थे। उनकी कहानियाँ बच्चों और बड़ों दोनों के दिलों को छू जाती हैं।

03

Nahin Hona Beemar का केंद्रीय भाव क्या है?

कहानी का केंद्रीय भाव यह है कि झूठ और बहाने का परिणाम सदा कठिन होता है। बच्चे की कल्पना में बीमारी आराम और खीर का जरिया लगती थी, पर असल में दिनभर भूखे-बोर रहना पड़ा। इसीलिए उसने फिर कभी बीमारी का नाटक नहीं किया।

04

बच्चे ने बीमारी का नाटक क्यों किया?

बच्चे ने होमवर्क नहीं किया था और स्कूल जाने का मन नहीं था। उसे डर था कि स्कूल जाने पर सजा मिलेगी। इसलिए उसने बीमार होने का बहाना बनाकर घर में रहने का फैसला किया।

05

'क्या ठाठ हैं बीमारों के!' — बच्चे के मन में यह भाव क्यों आया?

अस्पताल में सुधाकर काका को साफ-सुथरे बिस्तर पर आराम से लेटे और नानीजी के हाथ से साबूदाने की खीर खाते देखकर बच्चे को लगा कि बीमार रहना बड़े आराम का काम है। इसी से उसके मन में यह विचार आया।

06

नानाजी ने बच्चे को बीमार होने पर क्या दिया?

नानाजी ने बच्चे को कड़वी पुड़िया (दवा) खिलाई और काढ़े जैसी चाय पिलाई। साथ ही नानीजी को कह दिया कि आज इसे कुछ खाने को मत देना — यानी पूरे दिन बच्चे को भूखा रहना पड़ा।

07

काढ़ा क्या होता है?

काढ़ा कई तरह की जड़ी-बूटियों और औषधियों को उबालकर बनाया गया पेय होता है। इसे सर्दी-जुकाम, खाँसी-बुखार और पाचन की समस्याओं में लाभदायक माना जाता है।

08

साबूदाना किसे कहते हैं?

साबूदाना सागू नामक वृक्ष के तने का गूदा होता है। पहले यह आटे के रूप में होता है और फिर कूटकर दानों के रूप में सुखाया जाता है। इसे उपवास और बीमारी में खाया जाता है।

09

बच्चा दिनभर रजाई में पड़े-पड़े क्या सोचता रहा?

बच्चा घर के सदस्यों की गतिविधियों का अनुमान लगाता रहा — छोटे मामा का नहाकर निकलना, मुन्नू का जूता ढूँढ़ना, कुसुम मौसी का कॉलेज बस पकड़ना। साथ ही उसे गली की चहल-पहल देखने की तड़प, स्कूल में नमक-मिर्च वाले अमरूद की याद और खाने की जोरदार इच्छा भी होती रही।

10

मुन्नू को आम खाते देखकर बच्चे को कैसा लगा?

बच्चा चुपके से दरवाजे से झाँककर देखता है कि सब दाल-चावल और तली हरी मिर्च खा रहे हैं और मुन्नू आम चूस रहा है। यह देखकर बच्चे को जलन, गुस्से और कुढ़न हुई और वह पाँव पटकता वापस बिस्तर में आ गया।

11

कहानी के अंत में बच्चे ने क्या निर्णय किया?

पूरे दिन भूखे, बोर और अकेले रहने के बाद बच्चे को समझ आ गया कि स्कूल जाना ही बेहतर था। उसने मन में तय किया कि इसके बाद स्कूल से छुट्टी मारने के लिए वह कभी बीमारी का बहाना नहीं बनाएगा।

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Nahin Hona Beemar summary in hindi

यह स्वयं प्रकाश की हास्य कहानी है। एक बच्चा बीमार काका को आराम से खीर खाते देख सोचता है कि बीमार रहना मजेदार है। होमवर्क न होने पर वह खुद बीमारी का बहाना बनाता है। नानाजी कड़वी दवा देते हैं, खाना बंद करते हैं। दिनभर भूखा-बोर रहने के बाद बच्चा सीखता है कि झूठ का परिणाम दुखद होता है और वह फिर कभी ऐसा बहाना नहीं बनाता।

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