Class 4 Hindi

Chapter 13 — हमारा आदित्य

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Overview

Summary

Chapter 13 of the Class 4 Hindi NCERT textbook (Veena / वीणा), "हमारा आदित्य", एक रोचक संवाद-पाठ (dialogue) है जिसमें कक्षा में अध्यापक और विद्यार्थियों के बीच सूर्य और भारत के अंतरिक्ष यान आदित्य-L1 के बारे में बातचीत होती है। Download the PDF aur padhein saraansh, shabd-arth, aur pramukh prashn-uttar — yeh paath bachcho ko Aditya-L1 mission, Lagrange bindu, aur surya ke rahasyon se parichit karata hai.

  • सारांशयह पाठ एक कक्षा के संवाद के रूप में प्रस्तुत है। अध्यापक बच्चों को बताते हैं कि सूर्य एक तारा है जो मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम गैसों का विशाल गोला है। इसी चर्चा में भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा 2 सितंबर 2023 को प्रक्षेपित आदित्य-L1 अंतरिक्ष यान का परिचय दिया जाता है, जो सूर्य के रहस्यों का पता लगाने के लिए बनाया गया है।
  • मूल भावपाठ का मूल भाव यह है कि वैज्ञानिक जिज्ञासा और सही जानकारी मिलकर हमें अंधविश्वास से दूर करती है। बच्चे पहले सूर्य को 'सात घोड़ों के रथ पर सवार राजा' या 'ग्रह' समझते थे, लेकिन अध्यापक की बातचीत से उन्हें सही वैज्ञानिक तथ्य पता चलते हैं। पाठ के अंत में विद्यार्थी बड़े होकर अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनने की प्रेरणा लेते हैं।
  • आदित्य-L1 और लग्रांज बिंदुपाठ में बताया गया है कि 'आदित्य' का अर्थ सूर्य होता है और 'L1' का अर्थ है लग्रांज 1 बिंदु — अंतरिक्ष का वह विशेष स्थान जो सूर्य और पृथ्वी के केंद्रों को जोड़ने वाली रेखा पर होता है। इस बिंदु पर सूर्य और पृथ्वी की आकर्षण शक्तियाँ संतुलित होती हैं। लग्रांज 18वीं सदी के इटली के एक गणितज्ञ थे जिन्होंने इस बिंदु की खोज की थी; ऐसे कुल पाँच बिंदु (L1 से L5) होते हैं।
  • शब्दार्थ (मुख्य शब्द)पाठ में आए कुछ महत्त्वपूर्ण शब्द: 'आदित्य' — सूर्य; 'भास्कर' और 'दिनेश' और 'रवि' — ये सभी सूर्य के अन्य नाम हैं जो पाठ में विद्यार्थियों के नाम के रूप में भी उपस्थित हैं। 'कौतूहल' — जिज्ञासा; 'विस्फोट' — गैसों की टकराहट से सूर्य पर होने वाला बड़ा धमाका; 'सुरक्षित दूरी' — वह दूरी जहाँ रहकर आदित्य-L1 को सूर्य की गरमी से कोई हानि नहीं पहुँचती।
Essentials

Key points & formulas

  1. 01सूर्य एक तारा है — यह मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम गैसों का एक विशाल गोला है।
  2. 02आदित्य-L1 भारत के इसरो (अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) द्वारा 2 सितंबर 2023 को प्रक्षेपित किया गया अंतरिक्ष यान है।
  3. 03यह यान लग्रांज 1 (L1) बिंदु पर स्थित है — एक विशेष अंतरिक्ष स्थान जहाँ सूर्य और पृथ्वी की आकर्षण शक्तियाँ संतुलित हैं।
  4. 04आदित्य-L1 ने सूर्य के ग्यारह रंगों के चित्र भेजे हैं जो देखने में बहुत सुंदर हैं।
  5. 05यह यान लगभग 5 वर्ष तक सूर्य की परिक्रमा करते हुए उसके विभिन्न चित्र खींचता रहेगा।
  6. 06सूर्य पर गैसों की टकराहट से विशाल विस्फोट होते हैं जिनसे ऊर्जा निकलती है; आदित्य-L1 इसी का अध्ययन करेगा।
  7. 07'आदित्य', 'भास्कर', 'दिनेश', 'रवि' — ये सभी सूर्य के नाम हैं जो पाठ में विद्यार्थियों के नामों के रूप में भी दिखते हैं।
  8. 08सूर्य को सीधे आँखों से कभी नहीं देखना चाहिए — यह आँखों के लिए हानिकारक है।
Questions

Frequently asked questions

01

पाठ 'हमारा आदित्य' किस विधा में लिखा गया है?

यह पाठ संवाद (dialogue) विधा में लिखा गया है जिसमें कक्षा के अध्यापक और विद्यार्थियों के बीच सूर्य तथा आदित्य-L1 अंतरिक्ष यान पर बातचीत होती है।

02

सूर्य क्या है — ग्रह, तारा या कुछ और?

पाठ में अध्यापक बताते हैं कि सूर्य एक तारा है। यह मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम गैसों का एक विशाल गोला है।

03

आदित्य-L1 क्या है और इसे कब प्रक्षेपित किया गया?

आदित्य-L1 भारत के इसरो द्वारा 2 सितंबर 2023 को प्रक्षेपित अंतरिक्ष यान है। इसका कार्य सूर्य के बारे में जानकारी जुटाना है — जैसे सूर्य का ताप, उसकी आग का प्रभाव, और पृथ्वी पर पड़ने वाले प्रभाव।

04

'L1' का क्या अर्थ है?

'L1' का अर्थ है लग्रांज 1 बिंदु। यह अंतरिक्ष का एक विशेष स्थान है जो सूर्य और पृथ्वी के केंद्रों को जोड़ने वाली रेखा पर होता है। इस स्थान पर सूर्य और पृथ्वी की आकर्षण शक्तियाँ इस प्रकार संतुलित होती हैं कि यहाँ रखी कोई भी वस्तु पृथ्वी के साथ-साथ सूर्य की परिक्रमा करती रहती है।

05

लग्रांज कौन थे?

पाठ के अनुसार लग्रांज 18वीं सदी में इटली के एक गणितज्ञ थे जिन्होंने इस विशेष बिंदु के विषय में बताया था। उन्हीं के नाम पर इस बिंदु को लग्रांज बिंदु कहा जाता है। उन्होंने कुल पाँच ऐसे बिंदुओं (L1, L2, L3, L4, L5) का पता लगाया था।

06

आदित्य-L1 सूर्य की गरमी से क्यों नहीं जलता?

पाठ में अध्यापक बताते हैं कि आदित्य-L1 एक सुरक्षित दूरी पर स्थित है। इसीलिए सूर्य से उसे कोई हानि नहीं पहुँचती और वह समय-समय पर सूर्य के विभिन्न चित्र लेता रहता है।

07

आदित्य-L1 ने सूर्य के कितने रंगों के चित्र भेजे हैं?

पाठ के अनुसार आदित्य-L1 ने सूर्य के ग्यारह रंगों के चित्र भेजे हैं जो देखने में बहुत सुंदर हैं।

08

'आदित्य' शब्द का अर्थ क्या है और पाठ में इसके अन्य नाम क्या बताए गए हैं?

'आदित्य' का अर्थ सूर्य होता है। पाठ में 'भास्कर', 'दिनेश' और 'रवि' भी सूर्य के नाम बताए गए हैं — और मज़े की बात यह है कि इसी कक्षा में इन्हीं नामों के विद्यार्थी भी हैं।

09

सूर्य इतना गरम क्यों है?

पाठ में बताया गया है कि सूर्य की गरमी आग के जलने से नहीं होती। सूर्य हाइड्रोजन और हीलियम जैसी गैसों से बना है जो बहुत गरम होती हैं। इन गैसों की टकराहट से बहुत विशाल विस्फोट भी होते हैं जिनसे बड़ी मात्रा में ऊर्जा निकलती है।

10

क्या हम सूर्य को सीधे आँखों से देख सकते हैं?

नहीं। पाठ में अध्यापक बच्चों को स्पष्ट रूप से बताते हैं कि सूर्य को कभी भी प्रत्यक्ष देखने का प्रयास नहीं करना चाहिए क्योंकि यह आँखों के लिए हानिकारक है।

11

आदित्य-L1 कितने समय तक काम करेगा?

पाठ के अनुसार आदित्य-L1 लग्रांज बिंदु पर स्थित होकर लगभग 5 वर्ष तक सूर्य के चारों ओर घूमता हुआ उसके विभिन्न चित्र खींचता रहेगा।

12

पाठ पढ़कर विद्यार्थी क्या प्रेरणा लेते हैं?

पाठ के अंत में कई विद्यार्थी कहते हैं कि वे बड़े होकर अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनेंगे और दूर-दूर के तारों का अध्ययन करेंगे। इस पाठ का उद्देश्य बच्चों में वैज्ञानिक जिज्ञासा जगाना है।

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