Summary
Chapter 1 of the Class 4 Hindi NCERT textbook (Veena / वीणा), "ऐसा वर दो", ek sundar prarthna-kavita hai jo kavya तिरलोक तिहं ठकुरेला ne likhi hai. Is kavita mein ek baccha Bhagwan se varadaan maangta hai — phoolon ki tarah muskuraane ki shakti, doosron ki seva mein khushi paane ki bhavna, andheron se ladne ki tarah deepak banne ka saahas, aur sach ke raaste par chalne ki buddhi. Download the PDF aur padhein saraansh, shabd-arth, aur pramukh prashn-uttar.
- सारांश — "ऐसा वर दो" एक तीन-अंतरे वाली प्रार्थना-कविता है। कवि भगवान से वर माँगता है कि हम फूलों की तरह मुसकाएँ और सबको प्रेम-सुगंध बाँटें, दूसरों की सेवा में खुशी पाएँ। दूसरे अंतरे में दीपक की भाँति अंधकार से लड़ने और दुख से न घबराने की शक्ति माँगी गई है। तीसरे अंतरे में सत्य-मार्ग पर चलने, सबको सन्मार्ग दिखाने, और ज्ञान व बुद्धि से भरे होने का आशीर्वाद माँगा गया है।
- कवि परिचय — इस कविता के कवि तिरलोक तिहं ठकुरेला हैं, जैसा कि पाठ के अंत में दिया गया है। कविता बच्चों की सोच और भावना को ध्यान में रखकर लिखी गई है — ईश्वर से अच्छे गुण, सेवा-भाव, साहस, और ज्ञान की कामना करना।
- मूल भाव — कविता का मूल भाव है — दूसरों के लिए जीना और सच्चाई के रास्ते पर चलना। फूलों की तरह मुसकराना और प्रेम बाँटना, दीपक की तरह अंधकार मिटाना, और ज्ञान-बुद्धि से सबका भला करना — ये तीनों भाव मिलकर एक नेक इंसान बनने की प्रेरणा देते हैं।
- शब्दार्थ — कविता के कुछ महत्त्वपूर्ण शब्द: 'सद्गुण' — अच्छे गुण; 'परहित' — दूसरों की भलाई; 'तम' — अंधकार; 'ज्योतिर्मय' — प्रकाश से भरा हुआ; 'सत्य-मार्ग' — सच्चाई का रास्ता; 'सन्मार्ग' — सही रास्ता; 'सुबुद्धि' — अच्छी समझ।
Key points & formulas
- 01कविता "ऐसा वर दो" के कवि तिरलोक तिहं ठकुरेला हैं।
- 02यह कविता तीन अंतरों वाली एक प्रार्थना-कविता है।
- 03पहले अंतरे में फूलों की तरह मुसकराना और सबको प्रेम-सुगंध बाँटने की प्रार्थना है।
- 04दूसरे अंतरे में दीपक की तरह अंधकार से लड़ने और दुख से न घबराने की शक्ति माँगी गई है।
- 05तीसरे अंतरे में सत्य-मार्ग पर चलने और सबको सन्मार्ग दिखाने की कामना है।
- 06कविता में 'परहित' यानी दूसरों की सेवा में खुशी मनाने का भाव है।
- 07कविता के अंत में ज्ञान और बुद्धि से भरे होने का वरदान माँगा गया है।
- 08यह कविता Class 4 Hindi NCERT पुस्तक 'वीणा' (Veena) का पहला पाठ है।
Frequently asked questions
01"ऐसा वर दो" कविता किस पुस्तक में है?
यह कविता Class 4 की Hindi NCERT पुस्तक "वीणा" का पहला अध्याय है।
02"ऐसा वर दो" कविता के कवि कौन हैं?
इस कविता के कवि तिरलोक तिहं ठकुरेला हैं, जैसा पाठ के अंत में दिया गया है।
03कविता में भगवान से क्या-क्या वर माँगे गए हैं?
कविता में तीन तरह के वर माँगे गए हैं: फूलों की तरह मुसकराना और प्रेम बाँटना; दीपक की तरह अंधकार से लड़ने और दुख से न घबराने की शक्ति; और सत्य-मार्ग पर चलने तथा ज्ञान-बुद्धि से भरे होने का आशीर्वाद।
04कविता में 'दीपक' का उपयोग किस भाव को व्यक्त करने के लिए हुआ है?
कविता में 'दीपक' अंधकार (तम) से लड़ने और दुनिया को प्रकाशमय (ज्योतिर्मय) बनाने के भाव को व्यक्त करता है।
05'परहित' शब्द का अर्थ क्या है?
'परहित' का अर्थ है — दूसरों की भलाई करना। कविता में कहा गया है कि हम परहित करके खुशी मनाएँ।
06कविता में 'फूलों' की तुलना किससे की गई है?
कवि चाहता है कि हम फूलों जैसे मुसकराएँ और सबके बीच प्रेम की सुगंध फैलाएँ — जैसे फूल अपनी खुशबू सबको देते हैं।
07'सत्य-मार्ग' और 'सन्मार्ग' में क्या अंतर है?
कविता के अनुसार, 'सत्य-मार्ग' वह रास्ता है जिस पर हम खुद चलें, और 'सन्मार्ग' वह सही रास्ता है जो हम दूसरों को दिखाएँ।
08कविता में 'तन, मन सबल हमारे कर दो' से क्या आशय है?
इस पंक्ति में भगवान से शरीर (तन) और मन दोनों को मजबूत (सबल) करने की प्रार्थना की गई है ताकि हम दुख से न घबराएँ।
09कविता में 'ज्ञान' और 'बुद्धि' से भरने की प्रार्थना क्यों की गई है?
तीसरे अंतरे में कवि चाहता है कि हम ज्ञान और बुद्धि से भरे हों ताकि सत्य-मार्ग पर चल सकें और सबको मिलकर जीवन का फल (अच्छाई) दिला सकें।
10यह कविता Class 4 के बच्चों को क्या सिखाती है?
यह कविता बच्चों को प्रेम से मुसकराना, दूसरों की सेवा में खुश रहना, बुराई से लड़ना, सच बोलना और ज्ञान की राह पर चलना — ये नेक भाव सिखाती है।
11कविता में कितने अंतरे हैं और हर अंतरे का विषय क्या है?
कविता में तीन अंतरे हैं: पहला — प्रेम और सेवा-भाव; दूसरा — साहस और शारीरिक-मानसिक शक्ति; तीसरा — सत्य और ज्ञान। हर अंतरे के बाद 'भगवन हमको ऐसा वर दो' टेक दोहराई जाती है।
12क्या इस कविता का PDF NCERT की वेबसाइट पर उपलब्ध है?
हाँ, Class 4 Hindi Veena की पूरी पुस्तक NCERT की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। आप cbseprepmaster.com पर भी इस पाठ का PDF, सारांश, शब्दार्थ और प्रश्न-उत्तर पढ़ सकते हैं।
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