Summary
Chapter 8 of the Class 9 Hindi NCERT textbook (Ganga), 'Raidas Ke Pad' (रैदास के पद), संत कवि रैदास के इन पदों में प्रभु के प्रति अनन्य भक्ति और अटूट आस्था का भाव व्यक्त हुआ है, जहाँ बाह्य आडंबरों की जगह आंतरिक भक्ति को सच्चा धर्म माना गया है।
- भक्त-आराध्य का अटूट संबंध — पहले पद में रैदास भक्त और प्रभु के संबंध को चंदन-पानी, बादल-मोर, दीपक-बाती और मोती-धागे जैसे प्रतीकों से व्यक्त करते हैं — जैसे ये जोड़े कभी अलग नहीं होते, वैसे ही भक्त अपने आराध्य से अलग नहीं हो सकता।
- अडिग निष्ठा और आंतरिक भक्ति — दूसरे पद में रैदास कहते हैं कि यदि प्रभु भी संबंध तोड़ें तो वे नहीं तोड़ेंगे। तीर्थ और व्रत जैसे बाह्य आडंबरों से अधिक उन्हें प्रभु के चरण-कमल का भरोसा है — यही अनन्य और अडिग भक्ति का संदेश है।
- काव्य-सौंदर्य और अलंकार — पदों में अनुप्रास ('घन बन', 'चंद चकोरा'), उपमा ('मोती-धागा, जैसे सोने मिलत सुहागा') और रूपक ('चरन कमल') अलंकारों का सुंदर प्रयोग है। सरल ब्रजभाषा में अवधी, राजस्थानी व उर्दू-फारसी शब्दों का मिश्रण मिलता है।
Key points & formulas
- 01कवि: संत रैदास (रविदास) — जन्म काशी (वाराणसी); जीवन-काल 15वीं शताब्दी (1388–1518); भक्तिकाल के प्रमुख संत कवि
- 02विधा: पद (काव्य खंड) — सरल ब्रजभाषा में रचित, जिसमें अवधी, राजस्थानी, खड़ी बोली और उर्दू-फारसी शब्दों का मिश्रण है
- 03केंद्रीय भाव: भक्त और आराध्य का अटूट और अनन्य संबंध; बाह्य आडंबरों (तीर्थ-व्रत) के स्थान पर आंतरिक भक्ति को प्रधानता
- 04प्रमुख प्रतीक/उपमाएँ (पद 1): चंदन-पानी, घन बन (बादल-वन)-मोर, दीपक-बाती, मोती-धागा, स्वामी-दास
- 05काव्य-सौंदर्य: अनुप्रास अलंकार ('घन बन', 'चंद चकोरा'), उपमा अलंकार ('मोती-धागा, जैसे सोने मिलत सुहागा'), रूपक अलंकार ('चरन कमल')
- 06कठिन शब्दार्थ: 'घन' = बादल, मेघ; 'चकोर' = चंद्रमा का परम प्रेमी माना जाने वाला पक्षी; 'अंदेसा' = संशय, चिंता, आशंका
- 07रचनाओं का स्रोत: रैदास बानी (संपादक: डॉ. शुकदेव सिंह); भक्ति रचनाएँ आदि श्री गुरु ग्रंथ साहिब में भी सम्मिलित हैं
Frequently asked questions
01Raidas Ke Pad का सारांश क्या है?
रैदास के दो पदों में भक्त और आराध्य का अटूट संबंध दर्शाया गया है। पहले पद में चंदन-पानी, दीपक-बाती, मोती-धागे जैसे प्रतीकों से अनन्य भक्ति का भाव प्रकट होता है। दूसरे पद में रैदास कहते हैं कि प्रभु के चरणों में ही उनका एकमात्र भरोसा है; तीर्थ और व्रत से उन्हें कोई चिंता नहीं।
02Raidas Ke Pad के कवि कौन हैं?
इन पदों के कवि संत रैदास हैं, जिन्हें रविदास के नाम से भी जाना जाता है। उनका जन्म काशी (वाराणसी) में हुआ और उनका जीवन-काल 15वीं शताब्दी (1388–1518) माना जाता है।
03Raidas Ke Pad का केंद्रीय भाव क्या है?
दोनों पदों का केंद्रीय भाव अनन्य भक्ति और आराध्य के प्रति अटूट समर्पण है। रैदास ने बाह्य आडंबरों (तीर्थ, व्रत) का खंडन करते हुए मन की शुद्धता और आंतरिक भक्ति को ही सच्चा धर्म माना है।
04'अब कैसे छूटै राम रट लागी' पंक्ति का क्या अर्थ है?
इस पंक्ति का भाव है कि रैदास के मन में आराध्य (राम) का नाम इस प्रकार रच-बस गया है कि अब उसे छोड़ना असंभव है — यह अनन्य भक्ति और नाम-जप की गहरी आसक्ति को व्यक्त करता है।
05पहले पद में भक्त और आराध्य के संबंध को किन उपमाओं से व्यक्त किया गया है?
पहले पद में पाँच उपमाएँ हैं — (1) चंदन (प्रभु) और पानी (भक्त), (2) घन बन/बादल (प्रभु) और मोर (भक्त), (3) दीपक (प्रभु) और बाती (भक्त), (4) मोती (प्रभु) और धागा (भक्त), (5) स्वामी (प्रभु) और दास (भक्त)। इन सभी जोड़ों में अटूट और अन्योन्याश्रित संबंध है।
06'जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ' का क्या आशय है?
इस पंक्ति में रैदास की आराध्य के प्रति अटूट निष्ठा व्यक्त होती है — यदि प्रभु भी संबंध तोड़ना चाहें, तो भी भक्त उस संबंध को नहीं तोड़ेगा। यह एकतरफी और निःस्वार्थ भक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण है।
07'तीरथ बरत न करूँ अंदेसा' पंक्ति का भाव क्या है?
इस पंक्ति में रैदास कहते हैं कि उन्हें तीर्थ और व्रत न करने की कोई चिंता या संशय नहीं है, क्योंकि उनका एकमात्र आधार प्रभु के चरण-कमल हैं। बाह्य धार्मिक अनुष्ठानों की जगह आंतरिक भक्ति को प्रधान माना गया है।
08रैदास के पदों में कौन-कौन से अलंकार हैं?
इन पदों में तीन प्रमुख अलंकार हैं — (1) अनुप्रास अलंकार: 'घन बन', 'चंद चकोरा' में व्यंजन वर्णों की आवृत्ति; (2) उपमा अलंकार: 'तुम मोती, हम धागा, जैसे सोने मिलत सुहागा'; (3) रूपक अलंकार: 'तुम्हरे चरन कमल' — चरणों को कमल के रूप में अभेद कल्पना।
09रैदास ने किस भाषा में काव्य-रचना की?
रैदास ने सरल और व्यावहारिक ब्रजभाषा का प्रयोग किया है। उनकी भाषा में अवधी, राजस्थानी, खड़ी बोली और उर्दू-फारसी के शब्दों का भी मिश्रण है।
10'घन', 'चकोर' और 'अंदेसा' के अर्थ क्या हैं?
पाठ में दी गई शब्द-संपदा के अनुसार — 'घन' का अर्थ है बादल या मेघ; 'चकोर' एक पक्षी है जो चंद्रमा का परम प्रेमी माना जाता है; 'अंदेसा' का अर्थ है सोच, चिंता, शक या आशंका।
11रैदास का जीवन-परिचय क्या है?
रैदास (जिन्हें रविदास भी कहते हैं) का जन्म काशी (वाराणसी) में हुआ। उनका जीवन-काल 15वीं शताब्दी (1388–1518) माना जाता है। वे संत कवियों में गिने जाते हैं और उन्होंने बाह्य आडंबरों का खंडन कर मन की शुद्धता और आंतरिक भक्ति को सच्चा धर्म माना।
12Raidas Ke Pad summary in hindi
रैदास के दो पदों में अनन्य भक्ति का भाव है। पहले पद में चंदन-पानी, दीपक-बाती, मोती-धागे जैसे प्रतीकों से भक्त और प्रभु के अटूट संबंध को दर्शाया गया है। दूसरे पद में रैदास प्रभु के चरणों को एकमात्र आधार मानते हुए कहते हैं कि वे कभी यह संबंध नहीं तोड़ेंगे, चाहे तीर्थ-व्रत न भी करें।
13क्या Raidas Ke Pad अध्याय की PDF मुफ़्त है?
हाँ, बिना साइन-अप के मुफ़्त डाउनलोड करें।
More chapters in Ganga
Read Chapter 8 of Ganga, the Class 9 Hindi NCERT textbook (2026-27 edition), online for free: the complete chapter as published by NCERT with every diagram, solved example and exercise, with a chapter summary, question answers and revision notes. Open the NCERT PDF above, or browse all NCERT Class 9 textbooks.
Read offline with notes, solutions & mock tests
CBSE Prepmaster — free on iOS & Android