Class 9 Hindi

Chapter 7 — Main Aur Mera Desh

Open PDFReads in your browser
Overview

Summary

Chapter 7 of the Class 9 Hindi NCERT textbook (Ganga), 'Main Aur Mera Desh' (मैं और मेरा देश), कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' का यह निबंध व्यक्ति और राष्ट्र के अविभाज्य संबंध को गहराई से स्थापित करता है — कि नागरिक का सम्मान और देश का सम्मान अटूट रूप से जुड़े हैं।

  • व्यक्ति और देश का संबंधलेखक पहले स्वयं को घर, पड़ोस और नगर तक सीमित 'पूर्ण मनुष्य' मानते थे। दो जापानी घटनाएँ सिद्ध करती हैं कि नागरिक के कार्य देश की छवि बनाते-बिगाड़ते हैं — व्यक्ति और देश एक-दूसरे से अविभाज्य हैं।
  • लाला लाजपत राय का 'मानसिक भूकंप'विश्व-भ्रमण के बाद भी भारत की गुलामी का कलंक लाला लाजपत राय के माथे पर चिपका रहा। इस अनुभव ने लेखक की पूर्णता की भावना को तोड़ दिया और उन्हें व्यक्ति-राष्ट्र के गहरे संबंध का बोध कराया।
  • देश की दो आवश्यकताएँलेखक देश की दो मुख्य आवश्यकताएँ बताते हैं — शक्तिबोध (राष्ट्रीय आत्मविश्वास) और सौंदर्यबोध (सुरुचि व सांस्कृतिक चेतना)। वे निष्पक्ष चुनाव में योग्य उम्मीदवार को मत देना देश की उच्चता की कसौटी मानते हैं।
Essentials

Key points & formulas

  1. 01विधा — यह प्रश्नोत्तर (संवादात्मक) शैली में लिखा गया सामाजिक-राष्ट्रीय निबंध है।
  2. 02लेखक — कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' (जन्म 1906, सहारनपुर, उत्तर प्रदेश; पत्रकार व निबंधकार; पद्म श्री से सम्मानित; निधन 1995)।
  3. 03केंद्रीय भाव — व्यक्ति और देश एक-दूसरे से अविभाज्य हैं; देश के सम्मान में ही नागरिक का सम्मान निहित है और नागरिक के कार्यों का प्रभाव देश पर भी पड़ता है।
  4. 04लाला लाजपत राय का 'मानसिक भूकंप' — विश्व-भ्रमण में भी भारत की गुलामी का कलंक माथे पर चिपका रहा; इस अनुभव ने लेखक की पूर्णता की भावना को तोड़ दिया।
  5. 05देश की दो आवश्यकताएँ — शक्तिबोध (राष्ट्रीय आत्मविश्वास) और सौंदर्यबोध (सुरुचि व सांस्कृतिक चेतना); देश की उच्चता की कसौटी है — निष्पक्ष चुनाव में योग्य उम्मीदवार को मत देना।
  6. 06कठिन शब्दार्थ — तेजस्वी = प्रतापी, प्रभावशाली; संचित = इकट्ठा किया हुआ; लांछित = कलंकित; रसद = अनाज, भत्ता, राशन।
  7. 07कठिन शब्दार्थ — ठसक = ऐंठ, बनावटी शान; हँडिया = मिट्टी का बर्तन; सघन = घना; तरेड़ = दरार।
Questions

Frequently asked questions

01

Main Aur Mera Desh का सारांश क्या है?

लेखक पहले घर-पड़ोस-नगर तक स्वयं को 'पूर्ण मनुष्य' मानते थे। लाला लाजपत राय के अनुभव ने जब बताया कि विदेश में भी भारत की गुलामी का कलंक माथे पर रहा, तब लेखक को बोध हुआ कि व्यक्ति का गौरव देश के गौरव से अलग नहीं है। दो जापानी घटनाओं, कमालपाशा और पंडित नेहरू के प्रसंगों के माध्यम से यह सिद्ध किया गया है कि हर साधारण नागरिक भी अपने आचरण से देश का सम्मान बढ़ा या घटा सकता है। देश की दो मुख्य ज़रूरतें हैं — शक्तिबोध और सौंदर्यबोध।

02

Main Aur Mera Desh के लेखक कौन हैं?

इस निबंध के लेखक कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' हैं। उनका जन्म सन् 1906 में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में हुआ था। वे हिंदी के प्रसिद्ध निबंधकार व पत्रकार थे। उन्होंने 'नया जीवन' और 'विकास' पत्रों का संपादन किया और स्वतंत्रता संग्राम में भी भाग लिया। उन्हें 'पद्म श्री' से सम्मानित किया गया। सन् 1995 में उनका निधन हुआ।

03

Main Aur Mera Desh का केंद्रीय भाव क्या है?

इस निबंध का केंद्रीय भाव है कि व्यक्ति और देश एक-दूसरे से अविभाज्य हैं — 'मैं और मेरा देश दो अलग चीजें तो हैं ही नहीं।' नागरिक का प्रत्येक कार्य देश की छवि को प्रभावित करता है और देश की उन्नति या अवनति का प्रभाव नागरिक पर भी पड़ता है। हर साधारण नागरिक भी देश के सम्मान की रक्षा में योगदान दे सकता है।

04

इस निबंध में 'मानसिक भूकंप' से क्या अभिप्राय है?

लाला लाजपत राय ने अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस आदि देशों में घूमने के बाद कहा कि जहाँ भी वे गए, भारत की गुलामी की लज्जा का कलंक उनके माथे पर लगा रहा। यह अनुभव लेखक के लिए 'मानसिक भूकंप' था जिसने उनकी यह धारणा तोड़ दी कि व्यक्ति अपने घर-नगर की सीमाओं में ही पूर्ण हो सकता है।

05

स्वामी रामतीर्थ और जापानी युवक की घटना क्या है?

स्वामी रामतीर्थ जापान में रेल-यात्रा के दौरान फल न पाने पर बोले कि 'जापान में अच्छे फल नहीं मिलते।' एक जापानी युवक ने यह सुना और दूर से ताज़े फलों की टोकरी लाकर स्वामी जी को भेंट की। दाम लेने से इनकार करते हुए उसने केवल इतना माँगा कि स्वामी जी अपने देश में यह न कहें कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते। इस घटना से देश-गौरव की भावना का उदाहरण प्रस्तुत किया गया है।

06

जापान में विदेशी छात्र की घटना क्या थी और उसका परिणाम क्या हुआ?

एक विदेशी छात्र जापान में पढ़ने आया और सरकारी पुस्तकालय की पुस्तक में से दुर्लभ चित्र निकाल ले गया। एक जापानी विद्यार्थी ने यह देख पुस्तकालय को सूचित किया। पुलिस ने चित्र बरामद कर उस छात्र को जापान से निकाल दिया। इसके बाद पुस्तकालय के बाहर बोर्ड लगा दिया गया कि उस छात्र के देश का कोई भी नागरिक पुस्तकालय में प्रवेश नहीं कर सकता। इस घटना से सिद्ध होता है कि एक नागरिक का कुकर्म पूरे देश पर कलंक लगाता है।

07

कमालपाशा और बूढ़े किसान के प्रसंग से क्या संदेश मिलता है?

तुर्की के राष्ट्रपति कमालपाशा की वर्षगाँठ पर एक बूढ़ा किसान तीस मील पैदल चलकर मिट्टी की हँडिया में पाव-भर शहद भेंट करने आया। कमालपाशा विश्राम के कपड़े पहने ही नीचे उतरे, शहद ग्रहण किया और उसे 'सर्वोत्तम उपहार' कहा क्योंकि उसमें हृदय का शुद्ध प्यार था। बूढ़े को शाही सम्मान के साथ कार से गाँव पहुँचाया। संदेश यह है कि किसी कार्य का महत्व उसकी विशालता में नहीं, उसके पीछे की भावना में है।

08

पंडित नेहरू और रंगीन खाट वाले किसान का प्रसंग निबंध में कहाँ आता है?

एक किसान ने रंगीन सुतलियों से खाट बुनी और रेल में रखकर दिल्ली आया। प्रधानमंत्री पंडित नेहरू की कोठी पर खाट भेंट करते हुए वह भाव-मुग्ध हो गया। नेहरू जी ने खाट स्वीकार की और अपना हस्ताक्षरित फोटो उसे उपहार में दिया। यह प्रसंग भी यही बताता है कि भावना-पूर्ण छोटे से छोटा कार्य भी महान होता है।

09

शक्तिबोध और सौंदर्यबोध से लेखक का क्या तात्पर्य है?

लेखक के अनुसार देश को सबसे पहले दो चीज़ों की ज़रूरत है — शक्तिबोध और सौंदर्यबोध। शक्तिबोध का अर्थ है राष्ट्रीय आत्मविश्वास; अपने देश को दूसरे देशों से हीन बताकर या नकारात्मक चर्चा करके नागरिक देश के सामूहिक मानसिक बल को कमज़ोर करते हैं। सौंदर्यबोध का अर्थ है सुरुचि और स्वच्छता की भावना; गंदगी फैलाना, पीक थूकना, अश्लील भाषा आदि से देश की संस्कृति को आघात पहुँचता है।

10

देश की उच्चता और हीनता की कसौटी लेखक के अनुसार क्या है?

लेखक के अनुसार देश की उच्चता और हीनता की कसौटी है — चुनाव। जिस देश के नागरिक समझते हैं कि किसे मत देना चाहिए और किसे नहीं, वह देश उच्च है। जहाँ के नागरिक गलत नारों या व्यक्तियों के प्रभाव में आकर मत देते हैं, वह देश हीन है।

11

'अकेला चना क्या भाड़ फोड़े' — लेखक इस कहावत के बारे में क्या कहते हैं?

लेखक इस कहावत को 'सौ फीसदी झूठ' बताते हैं। वे कहते हैं कि इतिहास साक्षी है — बहुत बार अकेले चने ने ही भाड़ फोड़ा है। इससे उनका आशय है कि एक साधारण नागरिक भी अपनी दृढ़ भावना से देश के लिए महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

12

इस निबंध की भाषा-शैली की क्या विशेषता है?

यह निबंध प्रश्नोत्तर (संवादात्मक) शैली में लिखा गया है। लेखक स्वयं प्रश्न उठाते हैं और स्वयं ही उत्तर देते हैं। भाषा सरल, प्रवाहपूर्ण और व्यावहारिक है। लोकोक्तियों ('अकेला चना क्या भाड़ फोड़े') और तुलनात्मक बिंबों ('मानसिक भूकंप') का प्रभावी प्रयोग है। महाभारत के शल्य-कर्ण प्रसंग जैसे ऐतिहासिक संदर्भ भी आते हैं।

13

Main Aur Mera Desh summary in hindi

इस निबंध में कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' ने बताया है कि व्यक्ति और देश अविभाज्य हैं। लाला लाजपत राय के अनुभव, दो जापानी घटनाओं तथा कमालपाशा व नेहरू के प्रसंगों के माध्यम से यह सिद्ध किया गया है कि नागरिक का हर कार्य — चाहे छोटा हो या बड़ा — उसके देश की छवि को प्रभावित करता है। देश को शक्तिबोध और सौंदर्यबोध की आवश्यकता है और निष्पक्ष चुनाव देश की उच्चता की कसौटी है।

14

क्या Main Aur Mera Desh अध्याय की PDF मुफ़्त है?

हाँ, बिना साइन-अप के मुफ़्त डाउनलोड करें।

Keep learning

More chapters in Ganga

Read Chapter 7 of Ganga, the Class 9 Hindi NCERT textbook (2026-27 edition), online for free: the complete chapter as published by NCERT with every diagram, solved example and exercise, with a chapter summary, question answers and revision notes. Open the NCERT PDF above, or browse all NCERT Class 9 textbooks.

Read offline with notes, solutions & mock tests

CBSE Prepmaster — free on iOS & Android

Get the App