Summary
Chapter 2 of the Class 12 Hindi NCERT textbook (Antral), 'Biskohar Ki Maati' (बिस्कोहर की माटी), विश्वनाथ त्रिपाठी की आत्मकथा 'नंगातलाई का गाँव' का एक अंश है, जिसमें लेखक ने अपने गाँव बिस्कोहर की प्रकृति, माँ की ममता, बचपन की स्मृतियों और एक अविस्मरणीय नारी छवि का मार्मिक वर्णन किया है।
- स्मृति में जीवंत ग्रामीण प्रकृति — कमल, कोइयाँ, हरसिगार, सरसों और तीनों ऋतुओं की छटा के इन्द्रियजन्य वर्णन से लेखक बिस्कोहर के प्राकृतिक परिवेश को स्मृति में सजीव कर देता है, जो पूरे पाठ का भावात्मक आधार है।
- माँ की ममता प्रकृति की सहज वृत्ति के रूप में — माँ का दूध और बत्तख द्वारा अंडे सेने के दृश्य को साथ रखकर लेखक ममता को केवल मानवीय नहीं, प्रकृति की स्वाभाविक वृत्ति के रूप में दिखाता है — यह पाठ की मार्मिकता का केंद्र है।
- प्रकृति और नारी की एकाकारता — दस वर्ष की उम्र में देखी स्त्री लेखक को जूही-सी चाँदनी लगती है; 'प्रकृति सजीव नारी बन गई' — यही अनुभव उसके सौंदर्य-बोध की नींव बनता है और अंत में मृत्यु-बोध से भी जुड़ जाता है।
- आत्मकथात्मक गद्य-शैली — बचपन की सजीव, इन्द्रियबद्ध स्मृतियों को आत्मकथात्मक शैली में बुनकर त्रिपाठी व्यक्तिगत अनुभव को एक पूरे गाँव के जीवन का सजीव चित्र बना देते हैं।
Key points & formulas
- 01लेखक परिचय: विश्वनाथ त्रिपाठी; यह पाठ उनकी आत्मकथा 'नंगातलाई का गाँव' का अंश है और आत्मकथात्मक गद्य-शैली में लिखा गया है।
- 02मुख्य पात्र: बिसनाथ — लेखक स्वयं (विश्वनाथ) हैं; कथा का केंद्र उनका गाँव बिस्कोहर है।
- 03केंद्रीय भाव: गाँव की प्रकृति (कमल, कोइयाँ, हरसिगार, सरसों), माँ की ममता, बचपन की इन्द्रियजन्य स्मृतियाँ और एक अविस्मरणीय नारी-छवि — ये सब मिलकर पाठ का भावात्मक केंद्र बनाते हैं।
- 04प्रकृति-वर्णन: अकाल में लेंवडी के ताल से भसीण (कमल-ककड़ी) खोदकर लाने का उल्लेख; कोइयाँ (कुमुद/कोका-बेली) का शरद में सर्वत्र खिलना; हरसिगार, सिघाड़े, सरसों, कदंब सहित तोरी-लौकी-भिडी-भटकटैया जैसी सब्जियों के फूलों का वर्णन।
- 05ममता प्रसंग: माँ के दूध पीने की स्मृति और दिलशाद गार्डन के डियर पार्क में बत्तख द्वारा अंडों को सेने का दृश्य — दोनों के माध्यम से माँ की ममता को प्रकृति की सहज वृत्ति के रूप में दिखाया गया है।
- 06साँपों का वर्णन: डोंड़हा और मजगिदवा विषहीन; धामिन लंबी पर विषहीन; गोंहुअन (गाँव में 'फेंटारा' कहलाता) और घोर कड़ाइच सबसे खतरनाक; भटिहा के दो मुँह होते हैं।
- 07नारी-प्रकृति एकाकारता: बिसनाथ ने दस वर्ष की उम्र में एक स्त्री को देखा जो उन्हें जूही की खुशबू-भरी चाँदनी-सी लगी; 'प्रकृति सजीव नारी बन गई' — यह उनके सौंदर्य-बोध का आधार बना।
- 08कठिन शब्दार्थ (स्रोत से): भसीण = कमलनाल, कमल का तना; बरहा = खेतों की सिंचाई के लिए बनाई गई नाली; अगाध = भरपूर; सुबुकना = धीमे स्वर में रोना; इफ़रात = अधिकता।
Frequently asked questions
01बिस्कोहर की माटी के लेखक कौन हैं?
इस पाठ के लेखक विश्वनाथ त्रिपाठी हैं।
02Biskohar Ki Maati किस आत्मकथा का अंश है?
'बिस्कोहर की माटी' विश्वनाथ त्रिपाठी की आत्मकथा 'नंगातलाई का गाँव' का एक अंश है।
03बिसनाथ कौन हैं? पाठ में उनकी क्या भूमिका है?
बिसनाथ लेखक विश्वनाथ त्रिपाठी स्वयं हैं। पूरी कथा उन्हीं की बचपन की स्मृतियों के इर्द-गिर्द बुनी गई है।
04कोइयाँ क्या है? पाठ में इसकी क्या विशेषता बताई गई है?
कोइयाँ वही जलपुष्प है जिसे कुमुद या कोका-बेली कहते हैं। शरद में जहाँ भी गड्ढे और उसमें पानी होता है, कोइयाँ फूल उठती हैं। उत्तर भारत में यह प्रायः सर्वत्र मिलता है।
05अकाल के समय गाँव के लोग क्या खाते थे?
अकाल पड़ने पर लोग लेंवडी के ताल से भसीण (कमल-ककड़ी) खोदकर बड़े-बड़े खाँचों में सर पर लादकर खाने के लिए ले जाते थे।
06बिसनाथ पर क्या 'अत्याचार' हुआ?
जब बिसनाथ दूध पीने वाले ही थे कि छोटा भाई आ गया और उनका माँ का दूध छूट गया। माँ के दूध पर छोटे भाई का कब्जा हो गया और बिसनाथ को गाय का 'बेस्वाद दूध' पीना पड़ा।
07बत्तख और माँ की ममता की तुलना किस आधार पर की गई है?
दिलशाद गार्डन के डियर पार्क में बिसनाथ ने देखा कि बत्तख अपने अंडों को पंख फुलाकर दुनिया से बचाए रखती है और उन्हें इतनी सतर्कता व कोमलता से डैनों के अंदर छुपाती है। लेखक ने इस ममता को बिसनाथ की माँ की ममता के समकक्ष रखा।
08पाठ में किन-किन साँपों का वर्णन है?
डोंड़हा और मजगिदवा विषहीन थे; धामिन भी विषहीन लेकिन लंबी होती है; गोंहुअन को गाँव में 'फेंटारा' कहते थे — यह सबसे खतरनाक था; घोर कड़ाइच के काटने पर आदमी घोड़े की तरह हिनहिनाकर मरे; भटिहा के दो मुँह होते हैं।
09'प्रकृति सजीव नारी बन गई' — इस कथन का क्या अर्थ है?
बिसनाथ ने उस स्त्री को औरत के रूप में नहीं, जूही की लता बनी चाँदनी के रूप में देखा — चाँदनी भी प्रकृति, फूल भी प्रकृति और खुशबू भी प्रकृति। इस प्रकार लेखक के लिए वह नारी और प्रकृति एक हो गए।
10लेखक के अनुसार संगीत, गंध और बच्चे क्या हैं?
लेखक ने लिखा है — 'संगीत, गंध, बच्चे — बिसनाथ के लिए सबसे बड़े सेतु हैं काल, इतिहास को पार करने के।'
11Viswanath Tripathi ने पाठ के अंत में किस बात का उल्लेख किया है?
पाठ के अंत में लेखक ने लिखा है — 'इस स्मृति के साथ मृत्यु का बोध अजीब तौर पर जुड़ा हुआ है।' अर्थात् उस नारी की स्मृति मृत्यु-चेतना से जुड़ी है।
12'भसीण' और 'बरहा' का क्या अर्थ है?
पाठ के शब्दार्थ के अनुसार: भसीण = कमलनाल, कमल का तना; बरहा = खेतों की सिंचाई के लिए बनाई गई नाली।
13Biskohar Ki Maati mein garmi aur loo se bachne ke kya upay bataye gaye hain?
माँ लू से बचने के लिए धोती या कमीज से गाँठ लगाकर प्याज बाँध देतीं। लू लगने की दवा थी कच्चे आम का पन्ना — भूनकर गुड़ या चीनी में उसका शरबत पीना, देह में लेपना और उससे नहाना।
14क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?
हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।
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