HindiClass 12

Antral

Hindi Supplementary Reader3 Chapters

Chapter notes

What you'll learn in Antral

A quick revision map of Antral — the core idea and five key takeaways from each chapter. Tap any chapter to read the full NCERT PDF and detailed notes.

01

Surdas Ki Jhopri

Chapter 1 of the Class 12 Hindi NCERT textbook (Antral), 'Surdas Ki Jhopri' (सूरदास की झोंपड़ी), यह पाठ प्रेमचंद के उपन्यास 'रंगभूमि' का एक अंश है, जिसमें दृष्टिहीन पात्र सूरदास की अदम्य जिजीविषा और विपत्ति में पुनर्निर्माण की भावना को चित्रित किया गया है।

  • 1लेखक परिचय: इस पाठ के रचयिता प्रेमचंद हैं और यह उनके उपन्यास 'रंगभूमि' का अंश है।
  • 2विधा: गद्य (उपन्यास-अंश) — कहानी-शैली में लिखा गया।
  • 3केंद्रीय भाव: विपत्ति में प्रतिशोध नहीं, पुनर्निर्माण की अदम्य इच्छाशक्ति — सूरदास झोंपड़ी जलने के बावजूद किसी से प्रतिशोध नहीं चाहता, बल्कि पुनः बनाने का संकल्प लेता है।
  • 4मुख्य पात्र व घटनाएँ: सूरदास (दृष्टिहीन नायक), भैरों (झोंपड़ी में आग लगाने वाला, रुपये चुराने वाला), जगधर (ईर्ष्यालु पड़ोसी), सुभागी (भैरों की पत्नी जो सूरदास के रुपये वापस दिलाने का प्रण लेती है), मिठुआ (बालक जिसके शब्दों से सूरदास को नई ऊर्जा मिलती है)।
  • 5पाठ में आग की वर्णनात्मक छवियाँ हैं — जैसे 'मानो किसी मित्र की चिताग्नि है' — जो दृश्य को जीवंत बनाती हैं और घटना की गंभीरता व्यक्त करती हैं।
02

Biskohar Ki Maati

Chapter 2 of the Class 12 Hindi NCERT textbook (Antral), 'Biskohar Ki Maati' (बिस्कोहर की माटी), विश्वनाथ त्रिपाठी की आत्मकथा 'नंगातलाई का गाँव' का एक अंश है, जिसमें लेखक ने अपने गाँव बिस्कोहर की प्रकृति, माँ की ममता, बचपन की स्मृतियों और एक अविस्मरणीय नारी छवि का मार्मिक वर्णन किया है।

  • 1लेखक परिचय: विश्वनाथ त्रिपाठी; यह पाठ उनकी आत्मकथा 'नंगातलाई का गाँव' का अंश है और आत्मकथात्मक गद्य-शैली में लिखा गया है।
  • 2मुख्य पात्र: बिसनाथ — लेखक स्वयं (विश्वनाथ) हैं; कथा का केंद्र उनका गाँव बिस्कोहर है।
  • 3केंद्रीय भाव: गाँव की प्रकृति (कमल, कोइयाँ, हरसिगार, सरसों), माँ की ममता, बचपन की इन्द्रियजन्य स्मृतियाँ और एक अविस्मरणीय नारी-छवि — ये सब मिलकर पाठ का भावात्मक केंद्र बनाते हैं।
  • 4प्रकृति-वर्णन: अकाल में लेंवडी के ताल से भसीण (कमल-ककड़ी) खोदकर लाने का उल्लेख; कोइयाँ (कुमुद/कोका-बेली) का शरद में सर्वत्र खिलना; हरसिगार, सिघाड़े, सरसों, कदंब सहित तोरी-लौकी-भिडी-भटकटैया जैसी सब्जियों के फूलों का वर्णन।
  • 5ममता प्रसंग: माँ के दूध पीने की स्मृति और दिलशाद गार्डन के डियर पार्क में बत्तख द्वारा अंडों को सेने का दृश्य — दोनों के माध्यम से माँ की ममता को प्रकृति की सहज वृत्ति के रूप में दिखाया गया है।
03

Apna Malwa — Khau Ujaru Sabhyata Mein

Chapter 3 of the Class 12 Hindi NCERT textbook (Antral), 'Apna Malwa — Khau Ujaru Sabhyata Mein' (अपना मालवा — खाऊ-उजाड़ू सभ्यता में), प्रभाष जोशी द्वारा लिखा गया पर्यावरण-केंद्रित निबंध है, जो जनसत्ता के 'कागद कारे' स्तंभ (1 अक्टूबर 2006) से लिया गया है। इसमें लेखक ने मालवा की नदियों, तालाबों और लोकजीवन का चित्रण करते हुए यूरोप-अमेरिका की खाऊ-उजाड़ू सभ्यता के कारण हो रहे पर्यावरणीय विनाश पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

  • 1लेखक परिचय: प्रभाष जोशी (सन् 1937-2009), इंदौर (मध्य प्रदेश) में जन्मे वरिष्ठ पत्रकार; 1983 में जनसत्ता के संपादक; 'कागद कारे' नाम से उनके लेखों का संग्रह प्रकाशित है।
  • 2विधा एवं स्रोत: यह पाठ पर्यावरण-केंद्रित ललित निबंध है; जनसत्ता के 'कागद कारे' स्तंभ, 1 अक्टूबर 2006 से लिया गया।
  • 3केंद्रीय भाव: खाऊ-उजाड़ू सभ्यता (यूरोप-अमेरिका की जीवन पद्धति) ने मालवा की नदियों, तालाबों और पर्यावरण को नष्ट किया है; 'विकास की औद्योगिक सभ्यता उजाड़ की अपसभ्यता है।'
  • 4मुख्य प्रसंग: लेखक नवरात्रि पर मालवा जाते हैं; ओंकारेश्वर और नेमावर के पास बजवाड़ा में नर्मदा के दर्शन; नागदा स्टेशन पर मीणा जी से भेंट; शिप्रा 'मैया ऐसी भरपूर और बहती हुई तो बरसों में दिखी थी।'
  • 5ऐतिहासिक जल-प्रबंध: मालवा के राजा विक्रमादित्य, भोज और मुंज ने पश्चिमी पुनर्जागरण से बहुत पहले तालाब और बड़ी-बड़ी बावड़ियाँ बनवाई थीं ताकि बरसात का पानी रुका रहे।

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