Summary
Chapter 2 of the Class 12 Hindi NCERT textbook (Vitan), 'Joojh' (जूझ), आनंद यादव की आत्मकथात्मक गद्य रचना है जिसका हिंदी अनुवाद केशव प्रथम वीर ने किया है। यह पाठ एक ग्रामीण लड़के के पढ़ाई के संघर्ष और सौंदलगेकर मास्टर की प्रेरणा से उसमें कविता-रचना की लगन जागने की सच्ची कहानी है।
- शिक्षा के लिए जुझारू संघर्ष — नायक पाठशाला जाने को तड़पता है पर दादा उसे खेत के काम में जोते रखते हैं। माँ के सहयोग और दत्ता जी राव देसाई के दबाव से वह फिर पाँचवीं में भेजा जाता है — यही शिक्षा-प्राप्ति की जिद पाठ की धुरी है।
- सौंदलगेकर मास्टर और कविता का जागरण — मराठी शिक्षक सौंदलगेकर सुरीले गले से छंद की चाल, यति-गति और रसिकता के साथ अभिनय सहित कविता पढ़ाते और स्वयं भी रचते थे। उनकी शिक्षा से नायक के मन में शब्दों का नशा चढ़ा और वह भैंस चराते हुए भी तुकबंदी करने लगा।
- अकेलेपन का रूपांतरण — पहले अकेलेपन से ऊब होती थी, पर कविता-लगाव के बाद 'जितना अकेला रहूँ, उतना अच्छा' — उसे ऊँची आवाज में गाने और अभिनय का अवसर मिलता। अनंत काणेकर की कविता को वह अपनी चाल में बिठाकर अभिनय सहित गाता।
- प्रमुख पात्र — नायक (आनंदा), खेत में जोते रखने वाले दादा, सहायक माँ, गाँव के प्रभावशाली दत्ता जी राव देसाई, होशियार कक्षा-मॉनीटर मित्र वसंत पाटील और प्रेरक मराठी-कविता शिक्षक सौंदलगेकर मास्टर।
Key points & formulas
- 01लेखक: आनंद यादव; हिंदी अनुवाद: केशव प्रथम वीर; विधा: आत्मकथात्मक गद्य (मूल मराठी से अनूदित)
- 02केंद्रीय भाव: शिक्षा के लिए जुझारू संघर्ष और कविता के प्रति स्वाभाविक लगाव का जागरण
- 03मुख्य पात्र: नायक (आनंदा / जकाते), दादा — पिता जो खेत में जोते रखते हैं, माँ — सहायक, दत्ता जी राव देसाई — गाँव के प्रभावशाली व्यक्ति जो दादा को समझाते हैं, वसंत पाटील — होशियार कक्षा-मॉनीटर मित्र, सौंदलगेकर मास्टर — मराठी-कविता शिक्षक
- 04सौंदलगेकर मास्टर सुरीले गले से, छंद की चाल और रसिकता के साथ कविताएँ पढ़ाते थे, बैठे-बैठे अभिनय के साथ भाव ग्रहण कराते थे और स्वयं भी कविता रचते थे
- 05कविता-लगाव से पहले अकेलेपन से ऊब होती थी; बाद में 'जितना अकेला रहूँ, उतना अच्छा' — ऊँची आवाज से गाने और अभिनय का अवसर मिलता था
- 06नायक ने अनंत काणेकर की कविता 'चाँद रात पसरिते पाँढरी गाया धरणीवरी' को मास्टर की चाल से अलग अपनी चाल में बिठाकर अभिनय के साथ गाया
- 07शब्दार्थ — गमछा: पतले कपड़े का तौलिया; जीमने: भोजन ग्रहण करना; यति-गति: कविता में रुकने एवं आगे बढ़ने के नियम
Frequently asked questions
01जूझ पाठ के लेखक कौन हैं?
जूझ के लेखक आनंद यादव हैं। यह मूलतः मराठी में लिखी गई रचना है जिसका हिंदी अनुवाद केशव प्रथम वीर ने किया है।
02Joojh chapter ka summary kya hai?
नायक (आनंदा) पढ़ाई की चाह रखता है लेकिन दादा उसे खेत में काम करवाते हैं। माँ की मदद से दत्ता जी राव देसाई दादा पर दबाव डालते हैं और लड़के को पाँचवीं में भेजा जाता है। वहाँ सौंदलगेकर मास्टर की काव्य-शिक्षा से उसे कविता लिखने की प्रेरणा मिलती है और शब्दों का नशा चढ़ने लगता है।
03'जूझ' शीर्षक का क्या औचित्य है?
पाठ का नायक पढ़ाई के लिए दादा के विरोध, खेत के बोझ, कक्षा के अपरिचित माहौल और छात्रों की खिल्ली — सभी से लगातार संघर्ष (जूझ) करता है। यह शीर्षक उसकी जुझारू प्रवृत्ति को उजागर करता है।
04दत्ता जी राव देसाई ने लेखक की किस प्रकार मदद की?
माँ और नायक रात को देसाई के घर गए और सारी बात बताई। देसाई ने दादा की खूब हजामत बनाई और आदेश दिया कि लड़के को पाठशाला भेजो; यदि नहीं भेजा तो वह सीधे देसाई के यहाँ आकर काम करे और पढ़े।
05सौंदलगेकर मास्टर की अध्यापन-शैली कैसी थी?
सौंदलगेकर मास्टर सुरीले गले से, छंद की चाल और रसिकता के साथ कविताएँ गाकर सुनाते थे, बैठे-बैठे अभिनय करके भाव ग्रहण कराते थे, कवियों के संस्मरण सुनाते थे और स्वयं भी कविता रचते थे।
06नायक को कविता लिखने का आत्मविश्वास कैसे हुआ?
जब नायक ने देखा कि सौंदलगेकर मास्टर के दरवाजे पर छाई मालती की बेल पर उन्होंने खुद कविता लिखी, तो उसे लगा कि अपने आसपास के दृश्यों — खेतों, जंगली फूलों — पर वह भी कविता बना सकता है।
07कविता के लगाव से पहले और बाद में अकेलेपन के प्रति नायक की सोच में क्या बदलाव आया?
पहले अकेलेपन से ऊब होती थी और हमेशा किसी साथी की जरूरत लगती थी। कविता के लगाव के बाद स्रोत-पाठ के अनुसार 'जितना अकेला रहूँ, उतना अच्छा' — अकेले में ऊँची आवाज से गाने और अभिनय करने का अवसर मिलता था।
08वसंत पाटील कौन था?
वसंत पाटील पाँचवीं कक्षा का दुबला-पतला किंतु बड़ा होशियार लड़का था जो कक्षा का मॉनीटर था। नायक ने उसकी देखादेखी पढ़ाई में मन लगाया और दोनों में गहरी दोस्ती हो गई।
09Joojh mein kon se master hain jo poetry padhate hain?
मराठी और कविता पढ़ाने वाले मास्टर का नाम न-वा-सौंदलगेकर था। वे सुरीले गले से कविता पढ़ाते, स्वयं कविता रचते और नायक को कविता-शास्त्र की बारीकियाँ बताते थे।
10पाठ में 'गमछा', 'जीमने' और 'यति-गति' के क्या अर्थ हैं?
पाठ के अनुसार — गमछा: पतले कपड़े का तौलिया; जीमने: भोजन ग्रहण करना; यति-गति: कविता में रुकने एवं आगे बढ़ने के नियम।
11नायक ने अनंत काणेकर की कविता को किस ढंग से गाया?
नायक ने अनंत काणेकर की कविता 'चाँद रात पसरिते पाँढरी गाया धरणीवरी' को मास्टर की चाल से अलग, एक सिनेमा के गाने के आधार पर अपनी चाल में बिठाकर अभिनय के साथ गाया।
12क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?
हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।
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