Summary
Chapter 3 of the Class 12 Hindi NCERT textbook (Vitan), 'Ateet Mein Dabe Paon' (अतीत में दबे पाँव), ओम थानवी का मुअनजो-दड़ो (सिंधु घाटी सभ्यता) की यात्रा पर आधारित एक यात्रा-वृत्तांत है, जिसमें उस प्राचीन नगर की सभ्यता, नगर-नियोजन और संस्कृति का जीवंत वर्णन मिलता है।
- उन्नत नगर-नियोजन — मुअनजो-दड़ो ताम्र काल का सबसे बड़ा नियोजित शहर था — लगभग 200 हेक्टेयर में फैला, करीब 85,000 आबादी। महाकुंड, ग्रिड-योजना की सड़कें, लगभग 700 कुएँ और ढकी नालियाँ इसकी उन्नत जल-संस्कृति दर्शाते हैं।
- खुदाई का ऐतिहासिक संदर्भ — 1922 में राखालदास बनर्जी ने खुदाई शुरू की और जॉन मार्शल के निर्देश पर व्यापक अभियान चला। इस खोज ने भारत को मिस्र व मेसोपोटामिया की प्राचीन सभ्यताओं के समकक्ष ला खड़ा किया।
- प्रसिद्ध कलाकृतियाँ — 'नर्तकी' शिल्प — मार्टिमर वीलर के अनुसार संसार में इसके जोड़ की चीज शायद ही होगी (अब राष्ट्रीय संग्रहालय, दिल्ली में) — तथा दाढ़ी वाले 'याजक-नरेश' की मूर्ति इस सभ्यता के सौंदर्य-बोध का प्रमाण हैं।
- लो-प्रोफाइल सभ्यता — हथियारों के अभाव के आधार पर लेखक कहते हैं 'अनुशासन जरूर था, पर ताकत के बल पर नहीं'। यहाँ का सौंदर्य-बोध राज या धर्म-पोषित न होकर समाज-पोषित था — लघुता में भी महत्ता अनुभव करने वाली संस्कृति।
Key points & formulas
- 01लेखक परिचय: ओम थानवी; विधा: यात्रा-वृत्तांत (गद्य)।
- 02केंद्रीय भाव: मुअनजो-दड़ो की यात्रा के माध्यम से सिंधु घाटी सभ्यता की उन्नत नगर-योजना, जल-प्रबंध और सौंदर्य-बोध का साक्षात्कार।
- 03मुख्य स्थल व तथ्य: महाकुंड (करीब चालीस फुट लंबा, पच्चीस फुट चौड़ा, सात फुट गहरा), मुख्य सड़क 'फर्स्ट स्ट्रीट' (तैंतीस फुट चौड़ी), बौद्ध स्तूप वाला चबूतरा, 'गढ़', विशाल कोठार।
- 04ऐतिहासिक संदर्भ: 1922 में राखालदास बनर्जी ने खुदाई शुरू की; जॉन मार्शल के निर्देश पर व्यापक अभियान चला; इस खोज ने भारत को मिस्र और मेसोपोटामिया की प्राचीन सभ्यताओं के समकक्ष ला खड़ा किया।
- 05प्रसिद्ध कलाकृतियाँ: 'नर्तकी' शिल्प — पुरातत्त्वविद मार्टिमर वीलर के अनुसार 'संसार में इसके जोड़ की दूसरी चीज शायद ही होगी' (अब दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में); दाढ़ी वाले 'याजक-नरेश' की मूर्ति।
- 06सभ्यता की विशेषता: हथियारों का अभाव — 'अनुशासन जरूर था, पर ताकत के बल पर नहीं'; सौंदर्य-बोध 'राज-पोषित या धर्म-पोषित न होकर समाज-पोषित था'; लेखक के शब्दों में 'लो-प्रोफाइल सभ्यता' — 'लघुता में भी महत्ता अनुभव करने वाली संस्कृति'।
- 07कठिन शब्दार्थ: 'इलहाम' = अनुभूति; 'कशीदेकारी' = कपड़ों पर फूल/चित्र अंकित करने की कला; 'परवर्ती' = परिपक्व/बाद का दौर।
Frequently asked questions
01अतीत में दबे पाँव पाठ के लेखक कौन हैं?
इस पाठ के लेखक ओम थानवी हैं।
02Ateet Mein Dabe Paon kis cheez ka varnan hai?
यह पाठ लेखक ओम थानवी की मुअनजो-दड़ो (सिंधु घाटी सभ्यता) की यात्रा का वर्णन है, जिसमें उस प्राचीन नगर की सड़कें, महाकुंड, इमारतें, कलाकृतियाँ और सामाजिक व्यवस्था का विस्तृत चित्रण है।
03मुअनजो-दड़ो की खुदाई सबसे पहले किसने की?
1922 में राखालदास बनर्जी ने बौद्ध स्तूप के गिर्द खुदाई करते हुए ईसा पूर्व के निशान पाए। इसके बाद भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के महानिदेशक जॉन मार्शल के निर्देश पर व्यापक खुदाई अभियान शुरू हुआ।
04महाकुंड की विशेषताएँ क्या हैं?
महाकुंड करीब चालीस फुट लंबा, पच्चीस फुट चौड़ा और सात फुट गहरा है। इसमें उत्तर और दक्षिण से सीढ़ियाँ उतरती हैं। पानी न रिसे इसलिए चूने, चिरोड़ी के गारे और सफेद डामर का प्रयोग हुआ है। इसे सामूहिक अनुष्ठानिक स्नान का स्थल माना जाता है।
05मुअनजो-दड़ो की 'नर्तकी' मूर्ति के बारे में मार्टिमर वीलर ने क्या कहा था?
पुरातत्त्वविद मार्टिमर वीलर ने कहा था कि 'संसार में इसके जोड़ की दूसरी चीज शायद ही होगी।' यह मूर्ति अब दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में है।
06लेखक ने मुअनजो-दड़ो को 'लो-प्रोफाइल सभ्यता' क्यों कहा?
क्योंकि वहाँ भव्य राजप्रसाद, मंदिर या पिरामिड नहीं मिले। लेखक लिखते हैं — 'लघुता में भी महत्ता अनुभव करने वाली संस्कृति'। 'नरेश' का 'मुकुट' भी बहुत छोटा था।
07सिंधु घाटी सभ्यता में हथियारों के बारे में क्या जानकारी मिलती है?
लेखक के अनुसार मुअनजो-दड़ो से हड़प्पा तक समूची सिंधु सभ्यता में हथियार उस तरह नहीं मिले जैसे किसी राजतंत्र में होते हैं — 'अनुशासन जरूर था, पर ताकत के बल पर नहीं।'
08मुअनजो-दड़ो के नगर नियोजन की क्या विशेषता थी?
यहाँ की सड़कें सीधी और आड़ी थीं — जिसे आज 'ग्रिड प्लान' कहते हैं। मुख्य सड़क (फर्स्ट स्ट्रीट) तैंतीस फुट चौड़ी थी। घरों के दरवाजे मुख्य सड़क पर नहीं, बल्कि अंदर गलियों में खुलते थे।
09क्या सिंधु घाटी सभ्यता को जल-संस्कृति कह सकते हैं?
लेखक स्वयं यह प्रश्न उठाते हैं: 'नदी, कुएँ, कुंड, स्नानागार और बेजोड़ पानी-निकासी — क्या सिंधु घाटी सभ्यता को हम जल-संस्कृति कह सकते हैं?' केवल मुअनजो-दड़ो में सात सौ के करीब कुएँ थे और ढकी नालियों का सुव्यवस्थित बंदोबस्त था।
10सिंधु सभ्यता के सौंदर्य-बोध के बारे में पाठ में क्या कहा गया है?
एक पुरातत्त्ववेत्ता के हवाले से लेखक लिखते हैं कि सिंधु सभ्यता की खूबी उसका सौंदर्य-बोध है जो 'राज-पोषित या धर्म-पोषित न होकर समाज-पोषित था।'
11'इलहाम' और 'कशीदेकारी' शब्दों के अर्थ क्या हैं?
पाठ की पाद-टिप्पणी के अनुसार: 'इलहाम' = अनुभूति; 'कशीदेकारी' = कपड़ों पर फूल या चित्र अंकित करने की कला।
12क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?
हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।
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